Reservation: Blessing or Curse?

वर्षो पूर्व मैंने एक ऐसे देश में कुछ समय व्यतीत किया जो कभी सोने की खान होता था वहां की ज़मीन में एक खास किस्म का खनिज़ होता था जिससे वहां की ज़मीन बहुत उपजाऊ थी और वहां उत्तम प्रकार की खेती की जा सकती  थी किन्तु  कुछ लालची देशों ने उस पर निशांना साधा व् उस खनिज़ की खुदाई करके उसे देश से बाहर भेजने लगे.

सबसे पहले उन्होंने वहां की जनता को ज़मीन की रॉयल्टी देकर खेती रोक दी। फिर उन्हें विदेशी गाड़ियां, मुफ़्त शिक्षा,टीवी ,VCR , मैकडोनाल्ड,कोक,पेप्सी,बियर से अवगत कराया। स्थानीय लोगों को बड़ी बड़ी नौकरी व् तनखा पर रखा लेकिन वो ना के बराबर काम करते थे क्योकि शिक्षा के नाम पर  उन्हें बहुत आसानी से डिग्री दे दी जाती थी व्का ज्यादातर काम विदेशी ही करते थे ।

स्थानीय जनता बेहद खुश थी,सबकुछ इतनी आसानी से मिल रहा था । सब खुश थे कि बिना कुछ किये सब कुछ मिल रहा था। लोगों की काम करने क़ी आदत छूट गयी, बच्चों ने पढ़ना छोड दिया क्योंकि बच्चे चाहे पढ़े ना पढ़े , पास करना अनिवार्य था.औरतों ने काम करना छोड़ दिया क्योंकि पैसा इतना था की खाना होटल से आ जाता था।

30-40 वर्ष में विदेशियों ने उस देश को अच्छे से दुह लिया…….. फिर सब कुछ खत्म!!!

स्थानीय बड़े नेता व् मजदूर लीडर तब तक देश को लूटकर अन्य देशों में इंतज़ाम कर चुके थे। लोग भूखे मरने लगे। क़ीमती सामन बिकने लगा। लोग लाचार थे क्योंकि पिछली 2 पीढ़ी से न तो सोचने की आदत थी ना काम करने की। न कही दूसरे देश में जाकर नौकरी कर सकते थे न काम। पूरी की पूरी पीढ़ी पंगु हो गयी। जो गिरा हुआ पैसा नहीं उठाते ते अब ज़मीन में सिक्के ढूंढते थे। स्थानीय लोग सिर्फ चावल और समुंदर से निकली मछली पर गुज़ारा करते हैं.आज उस देश में यूनाइटेड Nations व  कुछ अन्य संस्थाओं के  प्रयास से हर महीने हर परिवार को सिर्फ गुजारे लायक राशि मिलती है।

दोस्तों यही स्थिती हमारे आरक्षित वर्ग की भी होने वाली है। अगर किसी समाज को काबू में करना है तो उसकी सोचने की ताक़त व् काम करने की चाहत को छीन लो खुद ब खुद वो गुलाम हो जायेंगे फिर उन्हें जैसे चाहो नचा सकते हो । कुछ ही समय बाद उनकी पीढ़ी में से सोचने व् तर्क करने वाले जींस कम होने लगेंगे. उनकी संख्या बढ़ जायेगी किन्तु उनके पास भी अयोग्य लोगों के लिए जगह कम पड़ जायेगी। जो आज बाकियों से अपने लिए लड़ रहे हैं कल स्वयं के लिए आपस में लड़ेंगे। उनका फायदा उठाने वाले गिद्ध ये जानते हैं इसलिये वो उन्हें तब तक फ्री का चारा देते रहेंगे जब तक वो खा खा कर इतने आलसी न हो जाएँ की चलना छोड दे। फिर उन्हें खाना आसान हो जायेगा।

जिसे वो आज फ्री की चाट समझकर खा रहे हैं वो ही उनका कल पेट ख़राब करेगी।
चूंकि अनारक्षित वर्ग को अधिक मेहनत करनी होगी इसलिए स्वाभाविक है उनका मानसिक विकास और भी ज्यादा  होगा।

It’s going to be survival for fittest .

 

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