कहाँ चूकते हैं हम !!!

 

  विदेश –nationalism-in-india-1-638-1जर्मनी का हाइवे..

ड्राइव करते हुए मैं रुकी और एक पुल के साइड में कॉफी पी रही थी। हवा से मेरा गिलास उड़कर पुल से नीचे जा गिरा। मै झुककर देखने लगी की कैसे नीचे जाकर गिलास उठा कर कचरे के डिब्बे में फेंकू। इतनी ही देर में एक कार रुकी और उसमे से एक व्यक्ति ने उतारकर गिलास उठाया और डस्टबिन में फेक दिया। उसने मुस्कुराकर मुझसे कहा कोई बात नहीं ,ये मेरी ड्यूटी है ये देश मेरा है।मैं उस वाकये को कभी नहीं भूल पायी।

भारत- लखनऊ .. बाहर बैठकर चाय पी रही थी ,तभी एक महिला कचरे का डिब्बा लेकर आई ,वो बहुत सभ्य परिवार से थी ,उन्होंने मेरे देखते ही देखते कचरा ठीक मेरे गेट के सामने उलट दिया। मैंने कहा की आप इसे मुनिस्पलिटी के कचरे के डिब्बे में क्यों नहीं फेंकती तो उन्होंने कहा आपके घर पर थोड़े ही फेंका है। आपको क्या तकलीफ है। गाड़ी आएगी अपने आप उठा लेंगे।
मुझे जर्मनी का वो अनजान शख्स याद आ गया। …

 

विदेश- जापान के एक छोटे से शहर के एक रेस्टुरेन्ट में खाना खाने गयी, मैंने छतरी बाहर ही स्टैंड में सूखने के लिए छोड़ दी। वापसी में मैं छतरी लेना भूल गयी। करीब 6 महीने के बाद मैं फिर वही गयी तो मुझे ध्यान आया की मैं यहाँ छतरी छोड गयी थी,छतरी महंगी नहीं थी पर यूं ही निकलते वक़्त मैंने उस रेस्टुरेन्ट के काउंटर पर पुछा क़ि मैं पिछली बार एक छतरी छोड गयी थी । उस लड़की ने मुझे रुकने के लिए कहा और अन्दर से जाकर वो बैग में रखी छतरी ले आई। उस पर एक स्टीकर लगा था ” for Indian lady” मेरे पास शब्द नहीं थे!!!

भारत.दिल्ली .. कनॉट प्लेस का एक रेस्टुरेन्ट मैं कुछ दोस्तों के साथ खाना खाने गयी। हाथ में रखा मोबाइल गलती से भूल गयी । आधे रास्ते याद आया तो वापिस गयी। बाहर पुछा पर मोबाइल नहीं मिला। I was depressed।
मुझे जापान की वो लड़की याद आ गयी।…..

 

विदेशफ्रांस का एक हाईवेमेरी स्पीड लिमिट से ज्यादा हो गयी तो एक पुलिस की गाड़ी आकर रुकी और मेरा चालान काट दिया। मैंने सॉरी कहा और कहा मैं इस देश की नहीं हूँ सो ट्रैफिक रूल नहीं जानती कृपया माफ़ करें। उन्होंने कहा आप मेरे देश की मेहमान हैं आपका स्वागत है किन्तु नियम के तहत आपको फाइन भरना ही पडेगा। मैं मजबूर हूँ लेकिन उसके अलावा अगर आपको कोई भी मदद चाहिये तो मैं तैयार हूँ। मैंने ख़ुशी ख़ुशी फाइन भर दिया!!!!

भारत.जयपुर मेरे ड्राईवर ने नो एंट्री में गाडी लगा दी जबकि वहां कोई बोर्ड नहीं था ट्रैफिक पुलिस वाले ने रोका। मैंने कहा भैया ड्राईवर नया है जयपुर की सड़के नहीं जानता। पुलिस वाला नहीं माना। मैंने कहा क़ानून तो कानून है आप चालान काट दीजिये मैं फाइन भर दूंगी। उसने कहा मैडम लाइए 100₹ दीजिये रफा दफा करिये।
मुझे फ्रांस का वो पुलिस वाला याद आ गया।…

 

विदेश-ओमान एअरपोर्ट. मैं बैठी फ्लाइट का इंतज़ार कर रही थी वहीं पास बैठे हुए कुछ अरब टाइप के लोगों के ग्रुप में से एक व्यक्ति ने मुझसे कुछ अपनी जबान में कहा जिसे मैं समझ नहीं पाई ,तभी दूसरे व्यक्ति ने उसे थप्पड़ मारा और उसे मेरे पास लेकर आया और उससे माफी मांगने को कहा। मैं समझ नहीं पाई क्यों। तभी उसने कहा क़ि मेरे दोस्त ने आपके लिए कुछ गलत कहा था ,साथ ही मैं भी इसकी तरफ से माफी माँगता हूँ। आप महिला है हमें आपका सम्मान करना चाहिए।वो शख्स एक मुस्लमॉन था!!!!!

भारतहर जगह हर समय होता बलात्कार,महिलओं से दुर्व्यवहार। फेसबुक पर जुड़ने के बाद आज जहाँ बहुत से लोगों ने सम्मान दिया वही आन कुछ लोगों ने मैसेंजर में वो शब्द भी इस्तेनाल किये जो शायद सभ्य समाज के दायरे के बाहर हैं।ये सब भारतीय भी हैं और मेरे अपने हमवतन भी किन्तु जब आज उनकी ये भाषा देखी तो ओमान का वो अरबी याद आ गया…….

 

समझ नहीं आता कि हम कहाँ गलत हो गये?

5000 साल पुराना इतिहास,सबसे पुराना धर्म, सैंकड़ो महापुरुष, हजारों देवी देवता किन्तु चरित्र कहाँ पीछे रह गया? । राम भी याद ,कृष्ण भी, पर सिर्फ मन्दिर या फ़ोटो में ….दिलों में नहीं.. क्या मन्दिर बनने से भगवान राम वापिस आ जायेंगे या रामराज्य?
राम राज्य था इसीलिए रावण ने भी सीता को उंगली से नहीं छुआ था। आज लोग घरों में रहती औरतों और मासूम बच्चों को भी नहीं छोड़ते..
केवट ने राम से ये नहीं कहा की आप राजा मैं केवट कैसे? अगर हम दोनों इंसान तो आप भगवान् कैसे?..

मीरा ने रैदास से कभी नहीं कहा की मैं आपके चरणों में क्यों बैठु ,क्योंकि ज्ञान देने वाले ज्ञान लेने वाले से बड़ा होता है।
महाराणा प्रताप चाहते तो अकबर से भीख में राज्य ले सकते थे ,किन्तु उन्होंने लड़कर मारना मांगने से बेहतर समझा। लेकिन आज मरने से मांगना भला।

हर आदमी के फ़ोन पर, फेस बुक पर,ऑफिस में ,घर में गाडी में हर जगह किसी ना किसी भगवान् की फ़ोटो लगी हैं। आश्चर्य क़ि बात है गलत काम करते हुए कोई भी भगवान् से नहीं डरता!!!!!!

हर आदमी देवी की फ़ोटो शेयर करता है ,नवरात्री में देवी क़ि पूरी भक्ति से पूजा भी करता है माता क़ि स्थापना करता है, लेकिन घर में बेटी हो जाये तो मातम होता है। औरतों के लिए अपशब्द इस्तेमाल करता है!!

ऐसा क्यों?
क्योंकी जो हमें याद रखना था वो भूल गए और जो भूलाना था बखूबी याद रखा। कभी हमारा एक नैतिक चरित्र हुआ करता था ,वो कब इतिहास में बदल गया हमें पता ही नहीं चला।आज ” हम” हम ना रहकर ” मैं” हो गए हैं… इसीलिए अकेले हो गए हैं।

“अकेले हैं तो कमजोर है,साथ होते तो दुनिया हमारे चरणों में होती”

क्या भूल सुधार के कोई आसार है???

I’m still optimistic………

7 thoughts on “कहाँ चूकते हैं हम !!!

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