Water water everywhere..

********जल बिन जग सून*********

#worldwaterday
मुझे याद है पिछले बरस देश के कई हिस्सों में भयंकर सूखे की स्थिति थी और पानी को लेकर बहुत सी जगहों पर फसाद की नौबत आ गयी थी। यहाँ तक की सरकार को एक स्पेशल ट्रेन भी पानी के लिये चलानी पडी। 
सोचिये एक साल बारिश ना होने पर ये हालात है अगर कहीं ज्यादा सूखा पड़ गया तो अगला महायुद्ध पानी पर होगा।
लेकिन कुछ समय बीतते ही भीषण वर्षा से ना जाने कितनी जगहों पर बाढ़ आ गयी, लेकिन सारा अमूल्य जल नाली के रास्ते बह गया।
हमारा देश दुनिया की 17 फीसदी आबादी को समेटे हुए है, लेकिन पानी उपलब्ध है सिर्फ 4 फीसदी।
 इसी चार फीसदी पानी ने बीते 5000 सालों से हमारी सभ्यता और संस्कृति का पोषण किया है। हमारे खेतों को सींचा, हरे-भरे जंगल दिए। हमारे समूचे जीवन चक्र में रचा-बसा होने के बाद भी हम इसे कुदरत की नेमत मानने की बजाय खैरात समझते रहे। 
हम भूल गए कि धरती के 70 फीसदी हिस्से पर पानी होने के बाद भी उसका सिर्फ एक फीसदी हिस्सा ही इंसानी हक में है। नतीजतन स्थिति यह है कि जलस्रोत तेजी से सूख रहे हैं। भारत ही नहीं, समूचे एशिया में यही स्थिति है, क्योंकि इस महाद्वीप में दुनिया की 60 फीसदी आबादी महज 36 फीसदी जल संसाधनों पर निर्भर है। बाकी सभी महाद्वीपों में जल संसाधनों के मुकाबले आबादी का अनुपात कहीं कम है।
इतनी किल्लत के बाद भी जान सामान्य नहीं चेत रहा।

मैं देखती हूँ रोज़ सवेरे शाम लोग गाड़ियों की ,घर के गेट और ड्राइव वे की पाइप लगा जम कर धुलाई करते हैं।
बर्तन वाली बाई पूरा नल चलाकर 40 मिनट तक बर्तन धोती है। नहाते समय बाल्टी में पानी बहता रहता गई और लोग हर हर महादेव करते हुए पानी की गंगा बहाते रहते हैं। वाशबेसिन में मंजन करते हुए नल खोलकर 10 मिनट तक दाँत साफ़ करते हैं। औरतें कपडे धोते हुए धड़ा धड़ पानी उंडेलती हैं ।और ये इसलिये की घर घर नल पहुँचने से लोग पानी की कीमत भूल गए हैं। 
वो दिन दूर नहीं जब नल से सिर्फ हवा निकलेगी पानी नहीं। अब तो कुँओं बावड़ियों में भी पानी नहीं मिलेगा क्योंकि बोरिंग रूपी ड्रैकुला ने जमीन का पानी भी चूस लिया है।
अभी तो सिर्फ पीने का पानी बोतलों में बिक रहा है ,किन्तु वक़्त बदलते नहाने का पानी भी खरीदना पड़ेगा और हफ्ते में एक ही बार नहा पाएंगे।
5 मिनट ब्रश करते वक़्त नल खुला रखने से 12 से 14 लीटर तक पानी बह जाता है। 15 मिनट नहाते ववत पानी खुला रखने से 40 से 50 लीटर पानी व्यर्थ हो जाता है। एक गाड़ी पाइप से धोने में 100 से 150 लीटर पानी लगता है। रोजमर्रा के दैनिक कामों में हर रोज़ 500 से 700 लीटर पानी लगता है। कहाँ से आयेगा इतना पानी ? 15 रु में पीने वाले पानी की एक लीटर की बोतल मिलती है जिस दिन से 700 लीटर पानी रोज़  खरीदना पड़ गया तो क्या करेंगे? 
खाने खर्चने के लिए कोई पैसा नहीं बचेगा सिर्फ पानी खरीदने में सारी कमाई निकल जाएगी!
हर आदमी पानी ये सोचकर खर्च करता है की बचाने की जिम्मेदारी दूसरे की है, मैंने पैसा खर्च करके बोरिंग करवाई है ,नल लगवाएं है ,फैंसी बाथरूम ,किचन बनवाये हैं ,खुल के खर्च करना मेरा अधिकार है ,लेकिन आपको मालूम है आपका पड़ोसी भी बिलकुल वैसे ही सोच रहा है!! तो पानी बचाएगा कौन??
पानी इश्वेर की दी हुई नेमतों में से एक है और इसका दुरुपयोग करने से तो इश्वेर भी अपने हाथ खींच लेगा।
पानी की बर्बादी को रोकना होगा व् जल संरक्षण करना होगा। कितना भी कोसेंगे लेकिन अगर पानी चूक गया तो अच्छी से अच्छी सरकार भी कुछ नहीं कर पायेगी क्योंकि पानी बनाने की फैक्ट्री सिर्फ इंद्रदेव के पास है उसका कोई टेंडर नहीं खुलता।
बोरिंग पर रोक लगनी चाहिए और बिजली की तरह पानी के भी मीटर लगने चाहिए। वर्षा के जल के संरक्षण के तरीके अपनाए और सामूहिक प्रयास से अपने गली मोहल्लों में वर्षा के जल के संरक्षण के लिए टैंक बनवाये।
जल जीवन है और हवा प्राण है !!
जिस तरह से हम हवा व् पानी का दुरूपयोग कर रहे हैं उससे तो भगवान भी हमें माफ़ नहीं करेगा

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