Kalyug ke Lakshan

बात तबकी है जब चारों पांडव व कृष्ण आखेट को गये, उनके साथ युधिष्टिर नही थे।
संध्या समय सभी बैठे विचार व चर्चा कर रहे थे तभी नकुल ने श्री कृष्ण से पूछा

“ये कलयुग क्या हूं व कलयुग कैसा होगा?”
बाकी तीनो पांडव भी यह जानने को उत्सुक हो गये।
श्री कृष्ण मुस्कुराये और कहा कि यह जानने के लिए तुम्हे एक कार्य करना होगा। श्री कृष्ण ने धनुष व तीर उठाये व चारों दिशाओं में एक एक तीर छोड़ दिया। फिर उन्होंने चारों पांडवों से चारों दिशाओं में जाकर तीर वापस लाने को कहा।
पांडव चारों दिशाओं की ऒर निकल गये।
जब अर्जुन तीर उठाने लगे तो उन्होंने पीछे से कोयल की आवाज़ सुनी उन्होंने मुड़ कर देखा तो एक कोयल मीठे सुर में कुहुक रही थी किन्तु वह जमीन में पड़े एक घायल खरगोश का माँस भी खा रही थी।खरगोश अत्यधिक पीड़ा में था। अर्जुन आश्चर्य से भर गये की इतना मीठा गाने वाली कोयल इतना घृणित कार्य कैसे कर रही थी।वो तीर उठा कर वापिस चल दिये।

भीम जहाँ गये वहां एक कुँए को घेरे हुए चार कुँए थे। उन चारों कुओं से मीठा पानी बाहर छलक रहा था क्योंकि वो पानी से लबालब भरे हुए थे,किन्तु फिर भी उनका पानी बीच के खाली सूखे कुऐ की और नही जा रहा था। भीम ने तीर उठाया और लौट पडे।

सहदेव जैसे ही तीर उठाने लगे जो की एक पर्वत के पास पड़ा था अचानक उस पहाड़ से एक बड़ी चट्टान लुढ़कने लगी ,वह अपने रास्ते मे आने वाले पेड़ों व छोटी चट्टानों को कुचलती हुई नीचे आ रही थी अचानक वह भूमि पर उगी हुये एक छोटे से पौधे की आड़ से रुक गयी। सहदेव विस्मय से भरे हुए लौटने लगे।

नकुल ज्यों ही तीर उठा कट मुड़ने लगे उन्होंने देखा की एक गाय बछड़े को जन्म दे रही है,बच्चा जन्मने के बाद वह उसे चाटकर साफ करने लगी बछड़ा कुछ देर में साफ हो गया किन्तु फिर भी गाय उसे निरंतर चाटती रही।यहां तक की बच्चे की कोमल त्वचा छिल गई और उसमें से खून निकलने लगा। लोगों ने बड़ी मुश्किल से गाय को बछड़े से अलग किया। नकुल गाय जैसी पवित्र जानवर के इस व्यवहार से चकित थे।
चारों पांडवों ने लौट कर श्री कृष्ण को अपना अपना अनुभव बताया तथा उनसे इनका अर्थ पूछा।

श्री कृष्ण ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया:

जो अर्जुन ने देखा उसका अर्थ है कलयुग में बहुत से संत अपनी वाणी से लोगों को आकर्षित करेंगे व मीठे वचन बोलकर लोगों में भ्र्म पैदा करेंगे किंतु असल मे वो अपने भक्तों का शोषण करेंगे वैसे ही जैसे कोयल खरगोश को खा रही थी।

जो भीम ने देखा उसका अर्थ है की कलयुग में कुछ लोगों के पास अथाह संपति व धन होगा जिसे वो तरह तरह के दिखावों पर ख़र्च करेंगे किन्तु उसी समाज मे रह रहे निर्धन व पीड़ितों की मदद नही करेंगे जिस प्रकार मीठे कुँए अपना पानी सूखे कुँए को नही दे रहे थे।

जो सहदेव ने देखा उसका अर्थ है कलियुग में लोगों शक्तिशाली लोगों के चरित्र का इतना पतन होगा की उस रास्ते मे वो कितनो को कुचल देंगे वो नही जानते किन्तु अंत मे सिर्फ इश्वेर ही किसी प्रकार उनके दुष्कर्मों का अंत करेगा जैसे उस छोटे से पौधे ने चट्टान को रोक दिया था।

और अंत मे नकुल ने कहा “भगवान गाय को तो हम माता मानते हैं उसने कैसे अपने बछड़े को आहत किया?”
श्री कृष्ण ने कहा -कलयुग में मातापिता अपने बच्चों को दुलार में इतना बिगाड़ देंगे की उस दुलार से उनके बच्चों का बहुत नुकसान होगा। लोग ज़रूरत से ज्यादा अपने बच्चों को मुहैया कराएंगे जिससे उनके बच्चे आत्मनिर्भर नही होने पाएंगे।
क्या आज यही सबकुछ हमारे इर्दगिर्द नही हो रहा?
गली गली में बाबाजी लोग दुकान लगाए लोगों को लूट रहे हैं। TV पर पाखंडी जन  लोगों में भय डालकर अंगूठियां,यंत्र व ताबीज़ बेच रहे हैं। पूजाओं व कष्ट निवारण के नाम पर पैसे ऐंठे जा रहे हैं।
कुछ लोगों के पास इतना धन है की वो नोटो के बिस्तर पर सोते हैं जैसे की हंमारे भृष्ट नेता अरबो खरबों रुपिया खर्च करते हैं सिर्फ अपने ऊपर ..किन्तु किसी गरीब का उद्धार उस पैसे से नही करते। पैसों से गुंडे पालते हैं किंतु गरीब को एक निवाला नही देते।
चरित्र का इतना पतन है की बलात्कार,खून ,अपहरण कुछ भी करवा देते हैं। पुलों में मिलावट से हज़ारों लोग उनके नीचे दबकर मर जाते हैं।अरबों का घपला करते हैं फिर या तो किसी लाइलाज बीमारी से मरते हैं,या जेल में सड़ते हैं नही तो उनकी संताने निक्कमी निकल आती हैं।
बच्चों को अत्यधिक दुलार का नतीजा की वो ज़िम्मेदारी से बचते हैं। माँ बाप बेटे को ऊपरी कमाई लाने पर पीठ ठोकते हैं ,चाहे रिश्वत से हाँसिल करें किन्तु बच्चोँ को महंगे मोबाइल, बाइक व कपड़े दिलाएंगे और फिर बच्चों में भी वही संस्कार आयेंगे। पैसे की ज़रूरत होने पर यही बच्चे गलत काम करने से नही हिचकेंगे।

हर बीमारी अपने लक्षणों से जानी जाती है ,लक्षण जान लेने पर उसके इलाज़ करने में सुविधा होती है यदि हम भी कलयुग के इन लक्षणों को जान गए हैं तो उसका उपचार संभव है

 

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