China Effect

मेरे प्रिय भारतवासियों

हम संख्या में चीन से कुछ ही पीछे हैं लेकिन दुनिया फतह करने में बहुत पीछे।

जब हम make in india , made in india , मेरा भारत महान, भारत मेरी जान में उलझे पडें है चीन अपने पंजे छोटे से छोटे देश मे फैला चुका है। कोई देश चीन से अछूता नही है। चीन की जड़ें बहुत गहरी फैल चुकी हैं।

वो भारत के गणेश लक्ष्मी और दिये भी बना रहा है, और रूस के फूलदान भी, वो अफ्रीका के ज़ेबरा भी बना रहा है और हॉलैण्ड के नकली टूलिप्स भी, वो samsung को मात करते नकली फ़ोन भी बना रहा है और Hyundai को मात करने वाली Cherry कार भी।

जब हम प्रजातंत्र, साम्यवाद, मार्क्सवाद में उलझे हैं चीन पूंजीवाद के पिछले दरवाजे से घुस कर अपना स्थान बना चुका हैं।

इतने देशों में घूम चुकी हूं लेकिन हर देश मे एक ही चीज कॉमन मिली .. चीन!!!

हम हनी सिंह से लेकर अमिताभ बच्चन ..
विराट से लेकर रजनीकांत में उलझे हुए हैं और चीन एक ऑक्टोपस की तरह दुनिया मे अपने पंजे फैला चुका है।

दिल्ली के पराठें इम्फाल में नही पहुंचते, महाराष्ट्र की सौल कढ़ी बलिया में नहीं पहुंच पाई लेकिन चाऊमीन हर जगह है।

जितना आप अपने देश के बारे में नही जानते उससे ज्यादा चीन आपके प्रदेशों के बारे में जानता है।

चीन ये भी जानता है कि दिवाली में आप गणेश लक्ष्मी खरीदते हैं और होली में पिचकारी , क्रिसमस में बिजली की लड़ और वास्तु का पिरामिड । लेकिन आप नही जानते की चीन में नया साल कब होता है?

वास्तु छोड़कर आपने फेंगशुई पकड़ लिया है और चावल छोडक़त फ्राइड राइस?

प्लीज ये bjp, कांग्रेस, बसपा, सपा से बाहर निकल कर अपनी अस्मिता के बारे में भी सोचना शुरू करिये वरना दुनिया की दूसरी बड़ी जनसंख्या होकर भी आप कद्दू बन जाएंगे ।

मैंने जो देखा समझा दिया आगे आपकी मर्जी!

Living life the right way

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एक बार एक राजा ने अपने तीन ख़ास मंत्रियों को बुला एक एक थैला दिया और उन्हें वन में से फलों को भर कर लाने को कहा।

पहले मंत्री ने सोचा कि राजा को अच्छे व ताज़े फल पाकर खुशी होगी सो उसने चुन चुनकर ताज़े व बढ़िया फलों से थैला भर लिया।

दूसरे मंत्री ने सोचा राजा को इतनी व्यस्तता में कहां इतनी फुरसत होगी कि वो थैले के फलों को एक एक कर देखेगा। सो उसने अच्छा ,बुरा जो फल पाया थैले में भर लिया।

तीसरे मंत्री ने सोचा कि राजा सिर्फ यही तो देखेगा कि किसका थैला बड़ा है, इसलिये उसने अपने थैले में कूड़ा करकट व पत्थर भर लिए।

तीनो दरबार मे पहुंचे।

लेकिन ये क्या??

राजा ने बिना कुछ देखे तीनों को कारागार में डालने की आज्ञा दे दी और कहा अगले एक महीने तक जो कुछ उन्होंने अपने थैले में जमा किया है उससे अपना पेट भरें।

पहले मंत्री ने आराम से महीना गुजार लिया।
दूसरे मंत्री ने कुछ दिन अच्छे फल खाये फिर सडे फल खाकर किसी तरह जीवन बचाया।
तीसरे मंत्री के पास जीवन बचाने के लिए कुछ नही था। कूड़ा व पत्थर खाने से जीवन कैसे बचता?

जीवन के आखरी चरणों मे जो शुरुआती समय में जमा करते हैं वही काम आता है।

प्रत्यक्ष में जब हम दूसरों के जीवन,सफलता व सम्पन्नता से रश्क करते है तो ये नही जानते कि उनके अंत से ही उनके जीवन मे किये गए कर्मों का अंदाज़ा हो जाता है….

वरना कोई महात्मा क्यों किसीकी गोली से मरता?

क्यों दुनिया पर राज करनेवाले अपने ही अंगरक्षकों की गोली से छलनी होते?

क्यों दूसरों के मुँह से निवाला छीनने वाले आखरी क्षणों में नलियों के सहारे जीने की कोशिश करते हैं ?

क्यों दूसरों के बेटों के हाथों में बंदूम देनेवालों के बेटे उनके ही घरों को आग लगा देते हैं?

क्यों नारी जाति को वस्तु की तरह इस्तेमाल करने वाले किसी औरत की ही वजह से जेल की सलाखों के पीछे सड़ते हैं?

क्यों नोटों के बिस्तर पर सोने वाले मृत्यु को उन्ही नोटों से नही खरीद पाते?

क्यों ईमान बेचने वालों को उन्ही का कोई विश्वासपात्र चन्द रुपयों के लिए धोखा देता है?

भीष्म पितामह को भी गलत पक्ष का साथ देने की सज़ा तीरों की शैया पर लेटकर भुगतनी पड़ी।

सदाचारी युधिष्टर की एक गलती ने उनकी पत्नी व भाइयों को अपमान की स्थिति में पहुंचा दिया!

जो कमाई जीवन के पहले हिस्से में जोड़ेंगे वही बाद के हिस्से में खर्च करने को मिलेगी।

ना अकूत पैसा ना बेशुमार ताक़त आपके अच्छे जीवन की गारंटी दे सकती है।

कोई गलत रास्ता आपको सही मंज़िल तक नही पहुंचा सकता।

ज़रा सोच के जोड़ना!!

क्योंकि जो जोड़ रहे हो बाद में उसी से काम चलाना पड़ेगा

9 Days of Navratri

देवी प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोsखिलस्य।

प्रसीद विश्वेतरि पाहि विश्वं त्वमीश्चरी देवी चराचरस्य।

देवी मां की उपासना व पूजा के ये 9 दिन बहुत पावन होते हैं, इसमें पूजापाठ के साथ साथ इच्छाओं के त्याग का भी बहुत महत्व है। यदि शरीर व स्वास्थ्य साथ दे तो सूक्ष्म व सादा भोजन करना चाहिए।

सर्व मंगलं मांगल्ये शिवे सर्वाथ साधिके।

शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणि नमोस्तुऽते॥

लेकिन यहाँ भोजन के त्याग से ज्यादा महत्वपूर्ण है बुरे विचारों व बुरे कर्मों का त्याग करना। हमारे मन मे जो बुराई रुपी राक्षस छुपे हैं माँ भगवती उनका नाश करे। कोशिश करके अपनी बुराइयों पर विजय पायें।

दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो:।
स्वस्थै स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।।
द्रारिद्र दु:ख भयहारिणि का त्वदन्या। सर्वोपकारकारणाय सदाह्यद्र्रचिता।।

आजकल व्यस्तता सबके जीवन मे अत्यधिक हैं फिर भी हो सके तो समय निकालकर चंडी पाठ या सप्तशती का पाठ करना चाहिये। प्रतिदिन पूरा पाठ ना हो सके तो थोड़ा थोड़ा करके पढ़ना चाहिए।

बहुत से लोग सिर्फ शब्दों पर जाते हैं आपको आश्चर्य होगा की उसमे कितने गूढ़ संदेश छुपे हैं।
यदि सिर्फ कवच का भी पाठ करें तो आप ज्यादा postive महसूस करेंगे।

क्योंकी कवच पाठ में हम अपने शरीर की बाहरी-आंतरिक अंगों की रक्षा और स्वस्थ रहने की बात करते हैं। कवच पाठ में एक-एक करके हम उन सभी अंगों का नाम ये श्रद्धा रखते हुए लेते हैं कि देवी दुर्गा उन अंगों को स्वस्थ रखते हुए हमें सुरक्षा कवच प्रदान करती हैं। इस तरह की पॉजिटिव सोच को जब हम किसी भी ईश्वरीय शक्ति से जोड़ते हैं तो वे बातें हमारे मन में और भी ज्यादा मजबूती से जड़ें जमा लेती हैं।

कुछ कुतर्की लोग उसमे से कुछ अंशो को अश्लील करार देते है जिसमे देवी के रूप की व्यख्या की गई है, उन्हें शब्दों के पीछे छुपा रहस्य नही समझ आ सकता। जिन लोगों को मनोहर कहानियां पढ़ने की आदत हो उन्हें देवी में माँ का रूप कैसे नज़र आएगा।

सृष्टिस्थिति विनाशानां शक्तिभूते सनातनि।
गुणाश्रये गुणमये नारायणि! नमोऽस्तुते॥

जो लोग किसी कारणवश पूजा पाठ या व्रत ना भी कर पाते हों उन्हें भी चिन्तित होने की आवश्यकता नहीं क्योंकी
“पूत कपूत सुने है पर ना माता सुनी कुमाता”

उनके ऊपर भी देवी मां की कृपा उतनी ही रहेगी बस थोड़ा बुराइयों का बलिदान माँ के चरणों मे कर दें।
धर्म का पालन विचारों में होना ज्यादा जरूरी है बजाय आडंबरों के!!

इस नवरात्री अपने अंदर के राक्षसों का मर्दन करें।

ना बुरा करें ना होने दें।

Injustice or justice

महाभारत में कर्ण ने श्री कृष्ण से पूछा ” मेरी माँ ने मुझे जन्मते ही त्याग दिया ,क्या ये मेरा अपराध था की मैंने मेरी माँ की कोख से एक अवैध बच्चे के रूप में जन्म लिया?

दोर्णाचार्य ने मुझे शिक्षा देने से इनकार कर दिया क्योंकी वो मुझे क्षत्रिय नही मानते थे, क्या ये मेरा कसूर था?

परशुराम जी ने मुझे शिक्षा दी किन्तु ये श्राप भी दिया कि मैं अपनी विद्या भूल जाऊंगा क्योंकी वो मुझे क्षत्रिय समझते थे?

भूलवश एक गौ मेरे तीर के रास्ते मे आकर मर गयी और मुझे गौ वध का श्राप मिला?

द्रोपदी के स्वयंबर में मुझे अपमानित किया गया क्योंकि मुझे किसी राजघराने का कुलीन व्यक्ति नही समझा गया?

यहाँ तक कि मेरी माता कुंती ने भी मुझे अपना पुत्र होने का सच अपने दूसरे पुत्रों की रक्षा के लिए स्वीकारा।

मुझे जो कुछ मिला दुर्योधन की दया स्वरूप मिला!
तो क्या ये गलत है की मैं दुर्योधन के प्रति अपनी वफादारी रखता हूँ?

श्री कृष्ण मंद मंद मुस्कुराते हुए बोले:
कर्ण ,मेरा जन्म जेल में हुआ था!
मेरा पैदा होने से पहले मेरी मृत्यु मेरा इंतज़ार कर रही थी!
जिस रात मेरा जन्म हुआ उसी रात मुझे मेरे माता पिता से अलग होना पड़ा!
मेरा बचपन रथों की धमक,घोड़ों की हिनहिनाहट तीर कमानों के साये में गुज़रा!

मैन गायों को चराया व उनके गोबर को उठाया!
जब मैं चल भी नही पाता था तो मेरे ऊपर प्राणघातक हमले हुए!

कोई सेना नही,कोई शिक्षा नही,कोई गुरुकुल नही,कोई महल नही, मेरे मामा ने मुझे अपना सबसे बड़ा शत्रु समझा!

जब तुम सब अपने वीरता के लिए अपने गुरु व समाज के लिए प्रशंसा पाते थे उस समय मेरे पास शिक्षा भी नही थी। 16 वर्ष की उम्र में मुझे ऋषि सांदीपनि के आश्रम में जाने का अवसर मिला!

तुम्हे अपनी पसंद के जीवनसाथी से विवाह का अवसर मिलता है और मुझे वो भी नही मिली जो मेरी आत्मा में बसती थी!
मुझे बहुत से विवाह राजनैतिक कारणों से या उन स्त्रियों से करने पड़े जिन्हें मैंने राक्षसों से छुड़ाया था!

मुझे जरासंध के प्रकोप के कारण मेरा सारा कुटुम्ब यमुना से ले जाकर दूर देश मे समुद्र के किनारे बसाना पड़ा!दुनिया ने मुझे कायर कहा!

यदि दुर्योधन युद्ध जीत जाता तो विजय का श्रेय तुम्हे भी मिलता, लेकिन धर्मराज के युद्ध जीतने का श्रेय अर्जुन को मिला! मुझे कौरवों ने अपनी हार का उत्तरदायी समझ!

हे कर्ण!किसी का भी जीवन चुनोतियों रहित नही है,सबके जीवन मे सब कुछ ठीक नही होता!कुछ कमियाँ अगर दुर्योधन में थी तो कुछ युधिष्टर में भी थी!
लेकिन सत्य क्या है और उचित क्या है ये हम अपनी आत्मा की आवाज़ द्वारा स्वयं निर्धारित करते हैं!

इस बात से कोई फर्क नही पड़ता कितनी बार हम पर अन्याय होता है, इस बात से कोई फर्क नही पड़ता कितनी बार हमारा अपमान किया जाता है,इस बात से कोई फर्क नही पड़ता कितनी बार हमारे अधिकारों का हनन होता है…
फ़र्क़ सिर्फ इस बात से पड़ता है कि हम उन सबका सामना किस प्रकार करते हैं!

जीवन मे यदि हमारे साथ कुछ गलत होता है तो उससे हमे कुछ गलत करने का अधिकार नही मिल जाता,किन्ही एक परिस्थतियों के लिए हम किन्ही दूसरी परिस्थितियों को ज़िम्मेदार नही ठहरा सकते।

अन्याय की परिभाषा हम स्वयं तय करते हैं, यदि आप नक़ल करते पकड़े जाएं तो वो अन्याय नही है,यदि ड्यूटी पर रिश्वत लेते पकड़े जाएं तो वो अन्याय नही है, ये आपकी गलतियों का फल हैं हम उसका प्रतिकार नही कर सकते।

जीवन के संघर्षपूर्ण दौर ही हमारी किस्मत तय करते है।

इश्वेर ने हमे दिमाग दिया है लेकिन उसे गलत या सही रूप में इस्तेमाल करने का जिम्मा हमारा है!

इश्वेर ने हमे दो हाथ दिया उनसे सोना खोदना है या किसी की कब्र ये निर्णय हमारा है!
इश्वेर ने हमे पैर दिये लेकिन उन्हें किस रास्ते पर चलना है ये निर्णय भी हमारा है!

संघर्ष तो दोनों और है लेकिन आप उसका कृष्ण की तरह सामना करते हैं या कर्ण की तरह !!

ये निर्णय आपका है….

Our Individual Time Zone

time

 

कालः सुप्तेषु जागर्ति कालो हि दुरतिक्रमः ।
कालः सर्वेषु भूतेषु चरत्यविधृतः समः ।।

क्या आप जानते हैं म्यामार (बर्मा) भारत से एक घण्टे आगे है तो क्या हम कहेंगे भारत म्यामार से धीरे है ?
भारत ब्रिटेन से 4.30 घण्टा आगे है तो क्या ब्रिटेन भारत से पीछे रह गया है?

जी नही !!दिन का जो समय भारत मे आता है वही समय म्यामार में एक घंटा पहले था और वही समय ब्रिटेन में साढ़े चार घन्टो बाद होगा।

यानी हम सब अपने समय मे चल रहे हैं!!

किसी की शादी छुटपन में हो गई कोई अभी कुंवारा है किसी के बच्चे सालों तक नही होती किसी के एक साल में ही हो जाते हैं

कोई 22 साल की उम्र में पढ़ाई खत्म कर 30 साल तक नौकरी के इंतज़ार में बैठा है और कोई 30 साल की उम्र में पढ़ाई खत्म करते ही नौकरी पा जाता है।

कुछ लोग 20 साल की उम्र में फौज में जाते हैं और 35 साल पर रिटायर भी हो जाते हैं कुछ लोग 35 साल पर नौकरी शुरू करते है और 60 साल में रिटायर होते हैं।

एक जवान इंसान एक्सीडेंट में मर जाता है और एक बीमार बुढा 90 साल की उम्र तक जीता रहता है।

क्यों????

क्योंकी हम सब अपने समय के दायरे में चलते हैं। हम अपना जीवन सिर्फ अपने समय के परिपेक्ष्य में जी सकते हैं किसी दूसरे के नही।

कभी कभी आपको लगता होगा आपके मित्र, भाई बहन आपसे आगे निकल गए और कभी आप कुछ लोगों से आगे निकल गये वो इसलिये की हममे से हर एक के समय की गति अलग है।

हम सभी को जीवन मे अपने समय मे ,अपनी गति से और अपने मार्ग से चलना होता है। इश्वेर ने हम सब के लिए एक व्यक्तिगत खाका तैयार किया है जो किसी दूसरे से अलग है

हमारी गति अलग है हमारा समय अलग है।

मोदी जी 8 साल की उम्र से RSS में थे किंतु 50 साल की उम्र में पहली बार MLA फिर CM बने ,योगी जी 26 साल की उम्र में MP बन गए और 44 साल की उम्र में CM!!

राजीव गांधी 40 साल की उम्र में प्रधान मंत्री बने और 46 साल की उम्र में मर गए मोरारजी देसाई 81 साल की उम्र में प्रधानमंत्री बने और 99 साल की उम्र में मरे!!

55साल की उम्र में ओबामा रिटायर हो गये और 70 साल की उम्र में डोनाल्ड ट्रम्प ने अपना कार्यकाल शुरू किया!!

जब 20साल का एक इंसान जवान कहा जाता है तो कुते के लिए वो आखिरी समय होता है।

जब हम एक ही दिन में रात व दिन महसूस करते हैं तो उत्तरी ध्रुव पर रहने वाले एस्किमो 6 महीने तक सिर्फ रात व 6 महीने तक सिर्फ दिन में रहते हैं तो क्या एक साल उनके लिए एक दिन व एक रात हैं?

घड़ियां कितनी भी हों समय एक ही होता है किंतु आपका व हमारा समय हमें अलग अलग परिणाम देता है।

कोई हमसे आगे है पीछे इससे कोई फर्क नही पड़ता क्योंकि हमें अपने समयनुसार चलना होता है।

किसी से अपनी तुलना मत करिये अपने समय के साथ चलिये।

कुछ देर नही हुई है..!!!

ना आपकों नौकरी मिलने में
ना शादी होने में
ना बच्चा होने में
ना प्रमोशन में
ना गाड़ी खरीदने में
ना घर खरीदने में
ना इन्क्रीमेंट बढ़ने में

जिस समय आप बुरे समय को कोस रहे होते हैं समय उस वक़्त भी चल रहा होता है जिस समय आप अच्छे वक़्त में ठहाके लगा रहे होते हैं समय उस वक़्त भी चल रहा होता है।

आपको भले ही लगे देर हो रही है किंतु समय जानता है की उसे कब आना है

ना तो देर हुई हैं ना ही कोई जल्दी है ,क्योंकि आपका समय अपने समय पर ही आएगा

बस !!भरोसा रखिये!!!

We are a shadow of our thoughts

positivity

दक्षिण प्रशांत महासागर में एक द्वीप संग्रह है जिसका नाम *सोलोमन आइलैंड है, वहां पर एक विचित्र परंपरा है।

वहाँ के आदिवासी किसी पेड़ को कुल्हाड़ी या आरी से नही काटते बल्कि जब किसी पेड़ को काटना होता है यो उसके गिर्द घेरा बनाकर प्रतिदिन उसे घंटो तक कोसते हैं

कुछ ही हफ्तों में पेड़ सूख जाता है व मर जाता है और फिर वो उसे उखाड़ देते हैं।

हममे से कुछ लोगों को ये विश्वास होना मुश्किल है की कैसे अमूर्त व अदृश्य विचार किसी पेड़ को मार सकते हैं?

अगर हम ये मानते हैं की पेड़ पौधों में भी जान होती है तो शायद उन पर बुरे विचारों व श्राप का असर होता होगा।

मैँ ये उदाहरण विज्ञान को चुनोती देने के लिये नही बात रही हूँ अपितु सिर्फ इस बात पर ध्यान दिलाने के लिए की हंमारे शब्दों व विचारों में किस प्रकार की ताकत होती है

इस ताक़त का उपयोग हम सकारात्मक व नकारात्मक दोनों ही रूपों में कर सकते हैं

हमारा अचेतन मन यानी subconscious mind, हमारे चेतन मन यानी conscious mind से कई गुना शक्तिशाली होता है और इसका प्रत्यक्ष असर हंमारे जीवन पर देखने को मिलता है।

कुछ माँ बाप अपने बच्चों को सदैव कोसते रहते हैं की वो कुछ ठीक से नही कर सकते यकीन मानिए ये सुनते सुनते वो बच्चे ये मान लेते हैं की वो सचमुच कुछ ठीक से नही कर सकते।

एक लड़की हमेशा से सुनती आती है की ससुराल एक बंधन है व सास ससुर उसे कभी प्यार नही कर सकते ,यकीन मानिये वो लड़की दुनिया के सबसे प्यार करने वाले ससुराल में भी दुख ढूंढ लेगी।

यदि कोई इंसान सैदव अपनी गरीबी का रोना रोता रहता है तो वो कभी अपने जीवन मे आपने वाली उपलब्धियों की ओर गौर नही करेगा।

कुछ लोग हमेशा बीमारी का गाना गाते रहते हैं उन्हें एक छींक आने से भी बीमारी का डर सताने लगेगा।

कुछ लोगों में ईर्ष्या इतनी होती है की यदि वो किसी अनजान को भी हँसते देख लें तो वो कुढ़ कुढ़ कर अपना दिन खराब कर लेते हैं।

कुछ लोग बुरी आदतों के शिकार होते हैं व ये जानते हुए भी वो उसे नही छोड़ते क्योंकी उसने उनके अचेतन मन पर कब्ज़ा किया हुआ है ।

हमारा चेतन मन हंमारे अचेतन मन की छाया होता है

इसलिये जब सोलोमन आइलैंड के लोग पेड़ को श्राप दे रहे होते हैं तो वो अपने मन की सारी कुंठा, हताशा, क्रोध, निराशा व दुःख उस पेड़ को देने लगते हैं और पेड़ धीरे धीरे उसे आत्मसात करने लगता है और उसकी अणु संरचना प्रभावित होते लगती है।(The biology of belief -Brouse H.Lipton)

यह हमारे साथ भी होता है,यदि हम निराशात्मक प्रकृति वाले लोगों के बीच रहते हैं तो उनकी कुंठा,निराशा व नेगेटिविटी धीरे धीरे हमारे मन मे भी जगह बना लेती है और हमारे अच्छे विचार प्रभावित होने लगते हैं ,कुछ दिन बाद हम भी उन्ही के जैसा सोचने लगते हैं ।

2500 वर्ष पहले गौतम बुद्ध ने कहा था
” आप अपने स्वयं विचारों का फल हैं”

कृपया अपने बच्चों को जो नही कर सकते उसके लिए कोसिए मत लेकिन जो कर सकते हैं उसकी प्रेरणा ज़रूर दीजिये। आपके बच्चे आपका प्यार हों, आपकी जायदाद नही।

इसी के साथ अपने आप को भी मत कोसिये वरना आप वही बन जाएंगे जो आप नही बनना चाहते।

नकारतात्मक सोच वाले लोगों की संगत से बचिये।वो आपको जीवन मे नीचे लाने के सिवाय कुछ नही करेंगे।

 

 

 

Kalyug ke Lakshan

बात तबकी है जब चारों पांडव व कृष्ण आखेट को गये, उनके साथ युधिष्टिर नही थे।
संध्या समय सभी बैठे विचार व चर्चा कर रहे थे तभी नकुल ने श्री कृष्ण से पूछा

“ये कलयुग क्या हूं व कलयुग कैसा होगा?”
बाकी तीनो पांडव भी यह जानने को उत्सुक हो गये।
श्री कृष्ण मुस्कुराये और कहा कि यह जानने के लिए तुम्हे एक कार्य करना होगा। श्री कृष्ण ने धनुष व तीर उठाये व चारों दिशाओं में एक एक तीर छोड़ दिया। फिर उन्होंने चारों पांडवों से चारों दिशाओं में जाकर तीर वापस लाने को कहा।
पांडव चारों दिशाओं की ऒर निकल गये।
जब अर्जुन तीर उठाने लगे तो उन्होंने पीछे से कोयल की आवाज़ सुनी उन्होंने मुड़ कर देखा तो एक कोयल मीठे सुर में कुहुक रही थी किन्तु वह जमीन में पड़े एक घायल खरगोश का माँस भी खा रही थी।खरगोश अत्यधिक पीड़ा में था। अर्जुन आश्चर्य से भर गये की इतना मीठा गाने वाली कोयल इतना घृणित कार्य कैसे कर रही थी।वो तीर उठा कर वापिस चल दिये।

भीम जहाँ गये वहां एक कुँए को घेरे हुए चार कुँए थे। उन चारों कुओं से मीठा पानी बाहर छलक रहा था क्योंकि वो पानी से लबालब भरे हुए थे,किन्तु फिर भी उनका पानी बीच के खाली सूखे कुऐ की और नही जा रहा था। भीम ने तीर उठाया और लौट पडे।

सहदेव जैसे ही तीर उठाने लगे जो की एक पर्वत के पास पड़ा था अचानक उस पहाड़ से एक बड़ी चट्टान लुढ़कने लगी ,वह अपने रास्ते मे आने वाले पेड़ों व छोटी चट्टानों को कुचलती हुई नीचे आ रही थी अचानक वह भूमि पर उगी हुये एक छोटे से पौधे की आड़ से रुक गयी। सहदेव विस्मय से भरे हुए लौटने लगे।

नकुल ज्यों ही तीर उठा कट मुड़ने लगे उन्होंने देखा की एक गाय बछड़े को जन्म दे रही है,बच्चा जन्मने के बाद वह उसे चाटकर साफ करने लगी बछड़ा कुछ देर में साफ हो गया किन्तु फिर भी गाय उसे निरंतर चाटती रही।यहां तक की बच्चे की कोमल त्वचा छिल गई और उसमें से खून निकलने लगा। लोगों ने बड़ी मुश्किल से गाय को बछड़े से अलग किया। नकुल गाय जैसी पवित्र जानवर के इस व्यवहार से चकित थे।
चारों पांडवों ने लौट कर श्री कृष्ण को अपना अपना अनुभव बताया तथा उनसे इनका अर्थ पूछा।

श्री कृष्ण ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया:

जो अर्जुन ने देखा उसका अर्थ है कलयुग में बहुत से संत अपनी वाणी से लोगों को आकर्षित करेंगे व मीठे वचन बोलकर लोगों में भ्र्म पैदा करेंगे किंतु असल मे वो अपने भक्तों का शोषण करेंगे वैसे ही जैसे कोयल खरगोश को खा रही थी।

जो भीम ने देखा उसका अर्थ है की कलयुग में कुछ लोगों के पास अथाह संपति व धन होगा जिसे वो तरह तरह के दिखावों पर ख़र्च करेंगे किन्तु उसी समाज मे रह रहे निर्धन व पीड़ितों की मदद नही करेंगे जिस प्रकार मीठे कुँए अपना पानी सूखे कुँए को नही दे रहे थे।

जो सहदेव ने देखा उसका अर्थ है कलियुग में लोगों शक्तिशाली लोगों के चरित्र का इतना पतन होगा की उस रास्ते मे वो कितनो को कुचल देंगे वो नही जानते किन्तु अंत मे सिर्फ इश्वेर ही किसी प्रकार उनके दुष्कर्मों का अंत करेगा जैसे उस छोटे से पौधे ने चट्टान को रोक दिया था।

और अंत मे नकुल ने कहा “भगवान गाय को तो हम माता मानते हैं उसने कैसे अपने बछड़े को आहत किया?”
श्री कृष्ण ने कहा -कलयुग में मातापिता अपने बच्चों को दुलार में इतना बिगाड़ देंगे की उस दुलार से उनके बच्चों का बहुत नुकसान होगा। लोग ज़रूरत से ज्यादा अपने बच्चों को मुहैया कराएंगे जिससे उनके बच्चे आत्मनिर्भर नही होने पाएंगे।
क्या आज यही सबकुछ हमारे इर्दगिर्द नही हो रहा?
गली गली में बाबाजी लोग दुकान लगाए लोगों को लूट रहे हैं। TV पर पाखंडी जन  लोगों में भय डालकर अंगूठियां,यंत्र व ताबीज़ बेच रहे हैं। पूजाओं व कष्ट निवारण के नाम पर पैसे ऐंठे जा रहे हैं।
कुछ लोगों के पास इतना धन है की वो नोटो के बिस्तर पर सोते हैं जैसे की हंमारे भृष्ट नेता अरबो खरबों रुपिया खर्च करते हैं सिर्फ अपने ऊपर ..किन्तु किसी गरीब का उद्धार उस पैसे से नही करते। पैसों से गुंडे पालते हैं किंतु गरीब को एक निवाला नही देते।
चरित्र का इतना पतन है की बलात्कार,खून ,अपहरण कुछ भी करवा देते हैं। पुलों में मिलावट से हज़ारों लोग उनके नीचे दबकर मर जाते हैं।अरबों का घपला करते हैं फिर या तो किसी लाइलाज बीमारी से मरते हैं,या जेल में सड़ते हैं नही तो उनकी संताने निक्कमी निकल आती हैं।
बच्चों को अत्यधिक दुलार का नतीजा की वो ज़िम्मेदारी से बचते हैं। माँ बाप बेटे को ऊपरी कमाई लाने पर पीठ ठोकते हैं ,चाहे रिश्वत से हाँसिल करें किन्तु बच्चोँ को महंगे मोबाइल, बाइक व कपड़े दिलाएंगे और फिर बच्चों में भी वही संस्कार आयेंगे। पैसे की ज़रूरत होने पर यही बच्चे गलत काम करने से नही हिचकेंगे।

हर बीमारी अपने लक्षणों से जानी जाती है ,लक्षण जान लेने पर उसके इलाज़ करने में सुविधा होती है यदि हम भी कलयुग के इन लक्षणों को जान गए हैं तो उसका उपचार संभव है