We are a shadow of our thoughts

positivity

दक्षिण प्रशांत महासागर में एक द्वीप संग्रह है जिसका नाम *सोलोमन आइलैंड है, वहां पर एक विचित्र परंपरा है।

वहाँ के आदिवासी किसी पेड़ को कुल्हाड़ी या आरी से नही काटते बल्कि जब किसी पेड़ को काटना होता है यो उसके गिर्द घेरा बनाकर प्रतिदिन उसे घंटो तक कोसते हैं

कुछ ही हफ्तों में पेड़ सूख जाता है व मर जाता है और फिर वो उसे उखाड़ देते हैं।

हममे से कुछ लोगों को ये विश्वास होना मुश्किल है की कैसे अमूर्त व अदृश्य विचार किसी पेड़ को मार सकते हैं?

अगर हम ये मानते हैं की पेड़ पौधों में भी जान होती है तो शायद उन पर बुरे विचारों व श्राप का असर होता होगा।

मैँ ये उदाहरण विज्ञान को चुनोती देने के लिये नही बात रही हूँ अपितु सिर्फ इस बात पर ध्यान दिलाने के लिए की हंमारे शब्दों व विचारों में किस प्रकार की ताकत होती है

इस ताक़त का उपयोग हम सकारात्मक व नकारात्मक दोनों ही रूपों में कर सकते हैं

हमारा अचेतन मन यानी subconscious mind, हमारे चेतन मन यानी conscious mind से कई गुना शक्तिशाली होता है और इसका प्रत्यक्ष असर हंमारे जीवन पर देखने को मिलता है।

कुछ माँ बाप अपने बच्चों को सदैव कोसते रहते हैं की वो कुछ ठीक से नही कर सकते यकीन मानिए ये सुनते सुनते वो बच्चे ये मान लेते हैं की वो सचमुच कुछ ठीक से नही कर सकते।

एक लड़की हमेशा से सुनती आती है की ससुराल एक बंधन है व सास ससुर उसे कभी प्यार नही कर सकते ,यकीन मानिये वो लड़की दुनिया के सबसे प्यार करने वाले ससुराल में भी दुख ढूंढ लेगी।

यदि कोई इंसान सैदव अपनी गरीबी का रोना रोता रहता है तो वो कभी अपने जीवन मे आपने वाली उपलब्धियों की ओर गौर नही करेगा।

कुछ लोग हमेशा बीमारी का गाना गाते रहते हैं उन्हें एक छींक आने से भी बीमारी का डर सताने लगेगा।

कुछ लोगों में ईर्ष्या इतनी होती है की यदि वो किसी अनजान को भी हँसते देख लें तो वो कुढ़ कुढ़ कर अपना दिन खराब कर लेते हैं।

कुछ लोग बुरी आदतों के शिकार होते हैं व ये जानते हुए भी वो उसे नही छोड़ते क्योंकी उसने उनके अचेतन मन पर कब्ज़ा किया हुआ है ।

हमारा चेतन मन हंमारे अचेतन मन की छाया होता है

इसलिये जब सोलोमन आइलैंड के लोग पेड़ को श्राप दे रहे होते हैं तो वो अपने मन की सारी कुंठा, हताशा, क्रोध, निराशा व दुःख उस पेड़ को देने लगते हैं और पेड़ धीरे धीरे उसे आत्मसात करने लगता है और उसकी अणु संरचना प्रभावित होते लगती है।(The biology of belief -Brouse H.Lipton)

यह हमारे साथ भी होता है,यदि हम निराशात्मक प्रकृति वाले लोगों के बीच रहते हैं तो उनकी कुंठा,निराशा व नेगेटिविटी धीरे धीरे हमारे मन मे भी जगह बना लेती है और हमारे अच्छे विचार प्रभावित होने लगते हैं ,कुछ दिन बाद हम भी उन्ही के जैसा सोचने लगते हैं ।

2500 वर्ष पहले गौतम बुद्ध ने कहा था
” आप अपने स्वयं विचारों का फल हैं”

कृपया अपने बच्चों को जो नही कर सकते उसके लिए कोसिए मत लेकिन जो कर सकते हैं उसकी प्रेरणा ज़रूर दीजिये। आपके बच्चे आपका प्यार हों, आपकी जायदाद नही।

इसी के साथ अपने आप को भी मत कोसिये वरना आप वही बन जाएंगे जो आप नही बनना चाहते।

नकारतात्मक सोच वाले लोगों की संगत से बचिये।वो आपको जीवन मे नीचे लाने के सिवाय कुछ नही करेंगे।

 

 

 

The Real Progress

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भारत उपलब्धियों का देश है इसमें कोई संदेह नही किन्तु पिछले 300 वर्ष में अगर तरक्की का मूल्यांकन किया जाये तो हम पाएंगे कि क्या वजह है जो पश्चिम हमसे आगे निकल गया।

यहॉ मैँ आध्यत्मिक या धार्मिक तरक्की की नही अपितु ,भौतिक, राष्ट्रीय व भौगोलिक तरक्की की बात कर रही हूँ

ये संदेश हिन्दू और मुसलमान दोनो के ही लिए है जब वो भारत की तरक्की में अपना अपना योगदान गिनाते हैं तो उन्हें ये सब भी जानना चाहिये।

यदि हम 250 वर्ष का इतिहास खंगाले तो पता चलता है , कि आधुनिक विश्व यानी 1800 के बाद , जो दुनिया मे तरक़्क़ी हुई , उसमें पश्चिमी मुल्को यानी यहूदी और ईसाई लोगो का बहुत बड़ा हाथ है !

हिन्दूओं और मुस्लिमो का इस विकास मे 1% का भी योगदान नही है !
हॉं !!…इतिहास में हमपर कितनी बार आक्रमण हुआ इससे किताबों के पन्ने रंगे पड़े हैं। ये गौरव की नही बल्कि शर्म की बात है की ना जाने कितनी विदेशी ताकतों ने हमे गुलाम बनाया, कुछ तो कमी रही होगी हमारे अन्दर!!

1800 से लेकर 1940 तक हिंदू और मुसलमान सिर्फ बादशाहत या गद्दी के लिये लड़ते रहे !हम आज़ादी के लिए तो लड़ते रहे लेकिन तरक्की के लिए लड़ना ज़रूरी नही समझा!

अगर आप दुनिया के 100 बड़े वैज्ञानिको के नाम लिखें , तो बस दो चार हिन्दू और मुसलमान के मिलेंगे ! बाक़ी सब पश्चिम देशों के हैं वो इसलिये की हमने अपने देश के वैज्ञानिकों को साधन व सहायता उपलब्ध कराना जरूरी नही समझा। नोबल पुरूस्कार पाने वालों में से कितने हिन्दू और मुसलमान हैं?

पूरी दुनिया मे 61 इस्लामी मुल्क है , जिनकी जनसंख्या 1.50 अरब के करीब है लेकिन कुल 435 यूनिवर्सिटी है !
दूसरी तरफ हिन्दू की जनसंख्या 1.26 अरब के क़रीब है लेकिन लगभग 385 ही यूनिवर्सिटी है !
इधर अकेले अमेरिका मे 3 हज़ार से अधिक और छोटे से देश जापान मे 900 से अधिक यूनिवर्सिटी है !

ईसाई दुनिया के 45% नौजवान यूनिवर्सिटी तक पहुंचते हैं ! वहीं मुसलमान नौजवान मुश्किल से 2% और हिन्दू नौजवान करीब 8 % से 10% उच्च शिक्षा ग्रहण करते हैं !

दुनिया के 200 बड़ी यूनिवर्सिटी मे से 54 अमेरिका में, 24 इंग्लेंड में ,17 ऑस्ट्रेलिया में ,10 चीन में, 10 जापान में ,10 हॉलॅंड में, 9 फ़्राँस में ,8 जर्मनी में , सिर्फ 2 भारत और 1 इस्लामी मुल्क में हैं !

आज़ादी से पहले हर उच्च शिक्षित भारतीय विदेश से शिक्षा ग्रहण करके आता था चाहे वो गांधी हों ,नेहरू हों या अंबेडकर। इस सभी ने कभी इस बात पर चर्चा नही की की भारत की एक मौलिक शिक्षा प्रणाली होनी चाहिए जो हमारे देश,समाज, संस्कृति व ज़रूरतों को मद्देनजर रखकर हो । आज भी हम अंग्रेजों द्वारा डिज़ाइन की गई शिक्षा प्रणाली को फेर बदलकर चला रहे हैं।

आज भी हमारी शिक्षा पद्धति सिर्फ नौकरों की फ़ौज तैयार करती है, जिसे प्राप्त करके युवा सिर्फ नौकरी ढूंढ सकते हैँ उद्योग व व्यवसाय करके स्वालंबी नही हो सकते।
लाखों रुपये की बिज़नेस की डिग्री हाँसिल कर युवा कुछ हज़ार रुपये की नौकरी ढूँढते हैं अपना व्यवसाय नही लगा सकते!

चलिये अब आर्थिक रूप से देखते है………..

अमेरिका का जी. डी. पी 14.9 ट्रिलियन डॉलर है !
जबकि पूरे इस्लामिक मुल्को का कुल जी. डी. पी 3.5 ट्रिलियन डॉलर है !
वहीं भारत का 1.87 ट्रिलियन डॉलर है !
दुनिया मे इस समय 38,000 मल्टिनॅशनल कम्पनियाँ हैं ! इनमे से 32000 कम्पनियाँ सिर्फ अमेरिका और युरोप में हैं !

आधुनिक दुनिया के 15,000 बड़े अविष्कारों मे 6103 अविष्कार अकेले अमेरिका में और 8410 अविष्कार ईसाइयों या यहूदियों ने किये हैं ! वो इसलिये की अभी भी तकनीकी व साइंस डिग्रियों में चल रही है कुछ नया ईजाद करने के लिये नही।

दुनिया के 50 अमीरो में 20 अमेरिका, 5 इंग्लेंड, 3 चीन , 2 मक्सिको , 2 भारत और 1 अरब मुल्क से हैं ! हमारे यहां अमीर होने का दिखावा तो है किंतु टैक्स के डर से खातों में सब अपने को गरीब दिखाते हैं!

अब बात करते हैं हिन्दू और मुसलमान जनहित , परोपकार या समाज सेवा मे भी ईसाईयों और यहूदियों से पीछे हैं !
आज रेडक्रॉस दुनिया का सब से बड़ा मानवीय संगठन है , इस के बारे मे बताने की जरूरत नहीं है !
बिल गेट्स ने अकेले ही 10 बिलियन डॉलर जो उनकी की करीब 90% संपत्ति है से बिल- मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन की बुनियाद रखी , जो कि पूरे विश्व के 8 करोड़ बच्चो की सेहत का ख्याल रखती है ! हमारे यहाँ लोग NGO इसलिय खोलते हैं जिससे अवैध फंडिंग मिल सके…
भारत में बहुत से अरबपति हैं !
मुकेश अंबानी अपना घर बनाने मे 4000 करोड़ खर्च कर सकते हैं ,अम्बानी बहुएं 5स्टार और 7 स्टार स्कूल पूंजीपतियों के बच्चों के लिए चलाती हैं लेकिन भारत के गरीब बच्चों के नाम पर दो चार NGO को दान देकर बरी हो जाती हैं अरब का अमीर शहज़ादा अपने स्पेशल जहाज पर 500 मिलियन डॉलर खर्च कर सकते हैं !
हमारे दलित नेता लाखों रुपये की गाड़ियों में चलते हैं लेकिन अपने वर्ग के गरीबों के उत्थान का ठेका सरकार से ही उठाते हैं।
मानवीय सहायता के लिये भी पूंजीपति आगे नही आ सकते हैं !

ओलंपिक खेलों में भी अमेरिका ही सब से अधिक गोल्ड जीतता है , हम खेलो में भी आगे नहीं ! हमारे बहुत से खिलाड़ियों को अपने खेल के साधन भी खुद ही जुटाने पड़ते हैं। पिछले दिनों भारत की पहली महिला आइस हॉकी की टीम ने इंटरनेट पर चंदा इक्कठा करके अपने बूते से विश्व् कप खेलने के लिए गई!

हम अपने अतीत पर चाहे जितना गर्व करें किन्तु व्यवहार से अत्यधिक स्वार्थी ही है ! हम आपस में लड़ने पर ही अधिक विश्वास रखते हैं !मानसिक रूप में आज भी हम विदेशी व्यक्ति से अधिक प्रवाभित हैं ! अपनी संस्कृति को छोड़ कर , विदेशी संस्कृति अधिक अपनाते हैं !सिर्फ हर हर महादेव और अल्लाह हो अकबर के नारे लगाने मे , हम सबसे आगे हैं !जरा सोचिये , कि हमें किस तरफ अधिक ध्यान देने की जरुरत है ! क्यों ना हम भी दुनिया में मजबूत स्थान और भागीदारी पाने के लिए प्रयास करें , बजाय विवाद उत्पन्न करने के और हर समय जात पात में उलझने के , खुद कि और देश की ऊन्नती पे ध्यान दे !समाज की जागृती का जिम्मा कुछ व्यक्तियो का ही नही बल्कि सभी जागरूक और विवेकशील नागरिकों के लिए भी उतना ही ज़रूरी है ।

 

Kalyug ke Lakshan

बात तबकी है जब चारों पांडव व कृष्ण आखेट को गये, उनके साथ युधिष्टिर नही थे।
संध्या समय सभी बैठे विचार व चर्चा कर रहे थे तभी नकुल ने श्री कृष्ण से पूछा

“ये कलयुग क्या हूं व कलयुग कैसा होगा?”
बाकी तीनो पांडव भी यह जानने को उत्सुक हो गये।
श्री कृष्ण मुस्कुराये और कहा कि यह जानने के लिए तुम्हे एक कार्य करना होगा। श्री कृष्ण ने धनुष व तीर उठाये व चारों दिशाओं में एक एक तीर छोड़ दिया। फिर उन्होंने चारों पांडवों से चारों दिशाओं में जाकर तीर वापस लाने को कहा।
पांडव चारों दिशाओं की ऒर निकल गये।
जब अर्जुन तीर उठाने लगे तो उन्होंने पीछे से कोयल की आवाज़ सुनी उन्होंने मुड़ कर देखा तो एक कोयल मीठे सुर में कुहुक रही थी किन्तु वह जमीन में पड़े एक घायल खरगोश का माँस भी खा रही थी।खरगोश अत्यधिक पीड़ा में था। अर्जुन आश्चर्य से भर गये की इतना मीठा गाने वाली कोयल इतना घृणित कार्य कैसे कर रही थी।वो तीर उठा कर वापिस चल दिये।

भीम जहाँ गये वहां एक कुँए को घेरे हुए चार कुँए थे। उन चारों कुओं से मीठा पानी बाहर छलक रहा था क्योंकि वो पानी से लबालब भरे हुए थे,किन्तु फिर भी उनका पानी बीच के खाली सूखे कुऐ की और नही जा रहा था। भीम ने तीर उठाया और लौट पडे।

सहदेव जैसे ही तीर उठाने लगे जो की एक पर्वत के पास पड़ा था अचानक उस पहाड़ से एक बड़ी चट्टान लुढ़कने लगी ,वह अपने रास्ते मे आने वाले पेड़ों व छोटी चट्टानों को कुचलती हुई नीचे आ रही थी अचानक वह भूमि पर उगी हुये एक छोटे से पौधे की आड़ से रुक गयी। सहदेव विस्मय से भरे हुए लौटने लगे।

नकुल ज्यों ही तीर उठा कट मुड़ने लगे उन्होंने देखा की एक गाय बछड़े को जन्म दे रही है,बच्चा जन्मने के बाद वह उसे चाटकर साफ करने लगी बछड़ा कुछ देर में साफ हो गया किन्तु फिर भी गाय उसे निरंतर चाटती रही।यहां तक की बच्चे की कोमल त्वचा छिल गई और उसमें से खून निकलने लगा। लोगों ने बड़ी मुश्किल से गाय को बछड़े से अलग किया। नकुल गाय जैसी पवित्र जानवर के इस व्यवहार से चकित थे।
चारों पांडवों ने लौट कर श्री कृष्ण को अपना अपना अनुभव बताया तथा उनसे इनका अर्थ पूछा।

श्री कृष्ण ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया:

जो अर्जुन ने देखा उसका अर्थ है कलयुग में बहुत से संत अपनी वाणी से लोगों को आकर्षित करेंगे व मीठे वचन बोलकर लोगों में भ्र्म पैदा करेंगे किंतु असल मे वो अपने भक्तों का शोषण करेंगे वैसे ही जैसे कोयल खरगोश को खा रही थी।

जो भीम ने देखा उसका अर्थ है की कलयुग में कुछ लोगों के पास अथाह संपति व धन होगा जिसे वो तरह तरह के दिखावों पर ख़र्च करेंगे किन्तु उसी समाज मे रह रहे निर्धन व पीड़ितों की मदद नही करेंगे जिस प्रकार मीठे कुँए अपना पानी सूखे कुँए को नही दे रहे थे।

जो सहदेव ने देखा उसका अर्थ है कलियुग में लोगों शक्तिशाली लोगों के चरित्र का इतना पतन होगा की उस रास्ते मे वो कितनो को कुचल देंगे वो नही जानते किन्तु अंत मे सिर्फ इश्वेर ही किसी प्रकार उनके दुष्कर्मों का अंत करेगा जैसे उस छोटे से पौधे ने चट्टान को रोक दिया था।

और अंत मे नकुल ने कहा “भगवान गाय को तो हम माता मानते हैं उसने कैसे अपने बछड़े को आहत किया?”
श्री कृष्ण ने कहा -कलयुग में मातापिता अपने बच्चों को दुलार में इतना बिगाड़ देंगे की उस दुलार से उनके बच्चों का बहुत नुकसान होगा। लोग ज़रूरत से ज्यादा अपने बच्चों को मुहैया कराएंगे जिससे उनके बच्चे आत्मनिर्भर नही होने पाएंगे।
क्या आज यही सबकुछ हमारे इर्दगिर्द नही हो रहा?
गली गली में बाबाजी लोग दुकान लगाए लोगों को लूट रहे हैं। TV पर पाखंडी जन  लोगों में भय डालकर अंगूठियां,यंत्र व ताबीज़ बेच रहे हैं। पूजाओं व कष्ट निवारण के नाम पर पैसे ऐंठे जा रहे हैं।
कुछ लोगों के पास इतना धन है की वो नोटो के बिस्तर पर सोते हैं जैसे की हंमारे भृष्ट नेता अरबो खरबों रुपिया खर्च करते हैं सिर्फ अपने ऊपर ..किन्तु किसी गरीब का उद्धार उस पैसे से नही करते। पैसों से गुंडे पालते हैं किंतु गरीब को एक निवाला नही देते।
चरित्र का इतना पतन है की बलात्कार,खून ,अपहरण कुछ भी करवा देते हैं। पुलों में मिलावट से हज़ारों लोग उनके नीचे दबकर मर जाते हैं।अरबों का घपला करते हैं फिर या तो किसी लाइलाज बीमारी से मरते हैं,या जेल में सड़ते हैं नही तो उनकी संताने निक्कमी निकल आती हैं।
बच्चों को अत्यधिक दुलार का नतीजा की वो ज़िम्मेदारी से बचते हैं। माँ बाप बेटे को ऊपरी कमाई लाने पर पीठ ठोकते हैं ,चाहे रिश्वत से हाँसिल करें किन्तु बच्चोँ को महंगे मोबाइल, बाइक व कपड़े दिलाएंगे और फिर बच्चों में भी वही संस्कार आयेंगे। पैसे की ज़रूरत होने पर यही बच्चे गलत काम करने से नही हिचकेंगे।

हर बीमारी अपने लक्षणों से जानी जाती है ,लक्षण जान लेने पर उसके इलाज़ करने में सुविधा होती है यदि हम भी कलयुग के इन लक्षणों को जान गए हैं तो उसका उपचार संभव है

 

Need For National Character

चीनियों ने अपने राष्ट्रीय पहचान के लिए चीन की दीवार “The Great Wall of China” बनाई जो दुनिया के 7 अजूबों में से एक है ।
उसके पीछे सोच थी की शायद इतनी ऊंची दीवार फांद कर कोई आक्रमण नही कर पायेगा किन्तु दीवार बनने के पहले 100 सालों में चीन पर 3 बार आक्रमण हुआ, और ये आक्रमण दीवार तोड़ कर या फांद कर नही किये गए बल्कि प्रहरियों को रिश्वत देकर दुश्मन अंदर घुस जाते थे
और ये इसलिये की चीनीयों ने पत्थर की दीवार को तो निर्माण कर लिया किन्तु वो अपने सैनिकों का चरित्र निर्माण व राष्ट्रीय चरित्र बनना भूल गये…..
कुछ इसी प्रकार के प्रहरी भारत मे कहीं कहीं होते है जो सेना व देश की गुप्त सूचनाएं दुश्मन तक पहुंचाते हैं। मुम्बई में समुन्दर के रास्ते घुसने वाले आतंवादियों को सारी सूचना किसी अंदर वाले ने ही दी थी ।
कश्मीर में BSF की चौकियों की अन्दुरुनी सूचना भी किसी अंदर वाले ने ही दी थी।
Siri के आतंकवादी जेल से फरार होने में सफल इसीलये हुए की कोई अंदर वाला बिक गया।

चीनी में एक कहावत है :-
*यदि आप किसी देश की संस्कृति को नष्ट करना चाहते है तो उसके 3 बड़े ही माकूल तरीके हैं :
1.पारिवारिक संरचनाओं को छिन्न भिन्न कर दो
2. शिक्षा का स्तर गिरा दो
3. समाज के आदर्शों को बदल दो व गलत व्यक्तियों का गुणगान करने लगो
भारतवर्ष में परिवार की संरचना पूर्णरूप से खंडित हो रही हैं । पारिवारिक कलह व झगड़े बढ़ रहे हैं । दायित्वों में कमी आ रही है। परिवार में द्वेष व ईर्ष्या का बोलबाला है। बच्चे उपेक्षित है,बुज़ुर्ग दयनीय अवस्था मे हैं,औरतें बच्चे नही पैदा करना चाहती,पुरुष काम नही करना चाहते। भाई भाई से बहन बहन से जायदाद के लिए कोर्ट कचहरी कर रही हैं। परिवार में ही लोग काटकपट करने लगे हैं।
शिक्षा के नाम पर भी अनाचार है, शिक्षक अज्ञानी हैं,शिक्षा पैसे से खरीदी जा रही है,पैसे देकर अध्यापक बनाये जा रहे हैं, प्राइवेट स्कूल लूट रहे है, आरक्षण से होनहार बच्चों का जज़्बा टूट रहा है। बच्चों पर ज्ञान का नही बल्कि percentage लाने का भूत सवार है।
समाज के आदर्श बदल रहे हैं, अपना उल्लू सीधे करने वाले नेताओं के हज़ारों अनुयायी हैं,पाखंडी बाबा लोग हैं, नवयुवक भाईगीरी को शान समझते हैं, गैंगस्टर्स के लिए जान देने वाले लोग हैं। धार्मिक उत्पाद फैलाने वालों की रैली में हज़ारों लोग होते हैं।गुंडों पर बनी फिल्में सफल होती हैं।

क्या संस्कार खरीदे जा सकते हैं?
जरा सोच के देखिये!!!
आक्रमण तो हर ऒर से हो रहा है!!
विदेशियों के घुसे बिना भी! और जब तक चरित्र निर्माण पर ध्यान नही दिया जाता हम पर ऐसे ही आक्रमण होते रहेंगे