“डेरा झूठा सौदा”

भारत आदिकाल से गुरुओं का देश रहा है जहां बहुत से गुरु हुए जिन्होंने समाज को राह दिखायी लेकिन आज भारत पाखंडी बाबाओं से भरा पड़ा है।

आज से करीब 190 साल पहले राजा राममोहन राय ने समाज के सभी धर्मों में तथाकथित धर्मगुरुओं के बढ़ते हुए आधिपत्य के बारे में कहा था कि श्रद्धालू इश्वेर की शक्ति को ना पहचानकर समाज मे से ही उपजे हुए कुछ लोगों की महत्वकांशा का शिकार हो जाएंगे। इसी कड़ी में औरतें कुछ और आगे बढ़कर उन्हें अपना सर्वस्व तक सौंपने को तैयार हो जाएंगी। ये समाज के पतन का कारण भी हो सकता हैं। (thoughts roughly extracted from “Indias Struggle for Independence” By Bipin Chandra)

राम रहीम, रामपाल,आसाराम,राधे माँ, और ना जाने कितने ऐसे नाम जो जनता को उल्लू बनाने की फैक्ट्रियां चला रहे है और लोग बड़े चाव से उन्हें TV पर ही दंडवत करके जन्म सफल करते रहते है ।

चलिये आपको बाबा कैसे बनते हैं उसकी एक सच्ची घटना बताती हूँ।बात कुछ पुरानी है लेकिन आज देश मे हो रहे ढोंग के व्यपार को मद्देनजर रखते हुए मैं इसे आपसे साझा कर रही हूँ ।

एक यात्रा के दौरान कुछ घण्टे एक बाबाजी का सहयात्री बनने का मौका मिला। वो जमाना मोबाइल रिकॉर्डिंग का नही था सो घटना दिमाग मे ही रिकॉर्ड रही।

उन बाबाजी ने बताया के वो 5 भाई बहन में अपने माँ बाप की सबसे नालायक संतान थे,पढ़ाई में मन नही लगता था,जब तब घर से भाग जाते थे। उनकी 2 ही विशेषता थी कि वो वाकपटु थे और सुरीला कंठ पाया था।

धन के अभाव में कभी मंदिर में तो कभी दुकानों के बरामदे में सो जाते थे। उन्हें किसी भी प्रकार के काम करने में कोई रुचि नही थी सिर्फ घूमना व आवारागर्दी करना पसंद था।

एक बार वो किसी चिलम बाबा के डेरे पर रुके वहां से उन्हें चिलम की लत लग गई। वहां उन्होंने सीखा की कैसे चिलम बाबा सारा दिन जनता को उल्लू बनाते थे। ज्यादातर लोग या तो घरेलू झगड़ों के तंत्र मंत्र कराने आते थे या अधिक अधिक से अधिक धन किस प्रकार प्राप्त हो इसके लिए चरण दबाते थे।

चिलमबाबा भक्तों को चिलम की राख भभूत बता कर बांटते रहते थे। रात में गुरु चेला खूब हंसते थे की किस प्रकार वो लोगों को काठ का उल्लू बनाते थे।

सबसे आसान शिकार घरेलू महिलाएं होती थी।

वहीँ से हमारे इन महाशय को बाबा बनने का आईडिया आया। पहले उन्होंने दाड़ी व बाल इत्यादी बढ़ाये। कई प्रकार की मालाएं पहनी हुलिया बदला। फिर उन्होंने वहां से कुछ दूर एक गाँव को अपनी शिकारस्थली के रूप में चुना।

वहां एक खेत मे पीपल के नींचे चबूतरे पर एक छोटा सा मंदिर बना हुआ था वहीँ डेरा डाला।

2-4 दिन में वो गांव के एक आध लोगों को राम कथा सुनाने लगे। धीरे धीरे रोज़ शाम को मंडली जुड़ने लगी। गांव के घरों से बाबा का भोजन आने लगा। बाबा के लिए कमरा बन गया।

बाबा ने एक दिन कहा की मैं एक हफ्ते तक ध्यान में जाऊँगा व गाँव के कल्याण के लिये भगवान से मिलकर आऊँगा। बाबा कमरे में बंद हो गए उन्होंने अपने एक शातिर चेले के माध्यम से अंदर भोजन इत्यादी की व्यवस्था कर ली। बाबा को ध्यान में देखने के लिए भीड़ जुड़ने लगी। एक हफ्ते बाद बाबा ने बाहर आकर कहा की वो साक्षात भगवान से मिलकर आएं हैं और भगवान ने कहा है की इस गांव में अगर एक भव्य मंदिर का निर्माण होगा व रोज़ भगवत कथा होगी तो भगवान ये इस गांव में आकर बस जाएंगे।

फिर क्या था मंदिर निर्माण के लिए चंदा जुटना शुरू हो गया। लोग हर संभव दान देने लगे। मंदिर का प्रांगण बड़ा हो गया। जिस बिचारे गरीब की ज़मीन थी उसपर सभी तरह का दबाव पड़ने लगा की वो ज़मीन अब भगवान की हो गई और उसके परिवार पर भगवान की कृपा हो गई। स्थानीय नेता भी बाबा के पास आने लगे क्योंकी बाबा अपने भक्तों को जिसे वोट देने को कहेंगे भक्त उसे ही वोट देंगे।

फिर आस पास की जमीनें हड़पने का सिलसिला शुरू हुए क्योंकी अब मंदिर ही नही आश्रम भी बनना था। अब बड़े बड़े सेठ लोग भी उसमे सहयोग देने लगे। बाबा का दरबार लगने लगा। छोटे बड़े सब बाबा के दरबार मे मत्था टेकने आने लगे। भंडारा होने लगा। मंदिर के बाहर दुकाने बन गयी वो भी मंदिर के ट्रस्ट के अधीन थी जिसके मुखिया बाबा व उनके साहूकार चेले थे। कारोबार चल निकला।

फिर एक दिन कीर्तन में बाबा की नज़र एक सुंदर दुखियारी पर पड़ी जिसे बाबा ने एकांत में बुलाया पता लगा पति को नशे की लत थी सो वो लड़कर मॉयके आ गयी थी। बाबाजी की lovestory शुरू हो गई। धीरे धीरे वो सुंदरी, साध्वी में बदल गयी व बाबा की सेवा में आश्रम में रहने लगी। उसका काम महिला श्रद्धालुओं की भीड़ जुटाने का था। सास बहू, पति पत्नी, बांझपन, पुत्र रत्न की प्रप्ति जैसे टोनों के लिए बाबाजी की सेवाएं ली जाने लगी। बाबाजी महिलाओं के भगवान हो गए।

वो हर महिला को कहते थे की सिर्फ वो ही बाबा के लिए बनी है और हर महिला अपने को बाबाजी की चहेती समझने लगी। बाबा की महिला टीम तैयार थी। गाहे बगाहे बाबा जी अपनी चेलियों को स्थानीय पावरफुल लोगों के पास भेजने लगे। जमीनें आश्रम के नाम पर खरीदी जाने लगी। फिर वहां पैसे वाली पार्टियों से product सप्लाई पर पैसा लगवाया जाने लगा। दान व धर्म के नाम पर काला पैसा सफेद करवाने का कारोबार शुरू हो गया। राजनेता भी बाबा की शक्ति को समझने लगे। उनके पैर छूने व आशीर्वाद लेने आने लगे।

बहुत खास लोगों के लिए आश्रम में सुर, सुरा सुंदरी सभी का इंतज़ाम होता था। सबकी बिगड़ी सवारने वाले बाबा जी ने सबसे पहले अपनी बिगड़ी सुधार ली।

कुटिया की जगह बाबा के महल बन गया। एक धूर्त निठल्ला अब भगवान बन गया। लोग उनकी माला, तावीज़ पहनने लगे और उल्लू बनने का सिलसिला चलता रहा।

जब तक हम अपने लालच, लोभ व गलत वृतियों को क़ाबू नही रखेंगे ना जाने ऐसे कितने बाबा हमारी कमज़ोरियों का फायदा उठाते रहेंगे ।

The Real Cancer 

असली कैंसर क्या है?
क्या कहीं ऐसा तो नही कि किसान भाइयों को अनजाने में बद दुआएँ मिल रही हों। जो अनाज व सब्जी हम शरीर को ऊर्जा देने के लिए खातें हैं वो कैंसर बनकर हमारे शरीर को खा रही हैं।
हमारे दुःख हमने खुद पैदा किये हैं। पारंपरिक खेती व खाद को त्याग कर हम यूरिया व अन्य रासायनिक पदार्थों का बड़े पैमाने पर खेती में उपयोग करने लगे। 
लालच के कारण किसान चौगुनी मात्रा में कीटनाशक दवाओं का उपयोग करते हैं। मौसम से पहले फल तोड़कर हम उसे अकृत्रिम रूप से पकाते हैं।
सब्जियो का आकार व वजन बढ़ाने के लिए उसमे हार्मोन्स का उपयोग करते हैं। यही हार्मोन्स शरीर मे कैंसर पैदा कर रहे हैं। एक ही रात में लौकी का वजन व आकर चार गुना हो जस्ता है। आज टमाटर का साइज संतरे जैसा हो गया है। 
सब्जियों को सुंदर दिखाने के लिये उन्हें विषैले रसायनों के घोल में डुबोते हैं।
गायों ले दूध की एक एक बूंद चूसने के लिए उन्हें दिन में दो बार *ऑक्सीटोसिन* का इंजेक्शन लगाते हैं और जब हमारे बच्चे वो दूध पीते हैं तो ये हार्मोन उनके शरीर मे विपरीत असर देते हैं। जिससे बच्चों में छोटी उम्र में puberty हार्मोन्स बढ़ने लगते हैं और उससे उनके शरीर मे कई तरह की बीमारियां बढ़ने लगती हैं।
पनीर में tissue पेपर व साबुन मिलता है। खोये में मिलावट है। चीनी में जानवरों की हड्डियाँ हैं।
तेल में अलसी है। चाय में बुरादा है। गुटके में विषैले रसायन हैं। शर्बत में रंग है। नूडल्स में लेड है। नलों से बोतलों में पानी भरकर मिनरल वाटर के नाम पर बेच रहे हैं। सुनार 22 कैरट में 20 कैरेट देते हैं। लिपस्टिक में मछली का तेल है। सिंदूर में लैड है। बिंदी में सस्ता गोंद है जिससे त्वचा का कैंसर होता है। शैम्पू में कपड़े धोने के साबुन जैसा ही सोडा है जिसे पहले आप बाल धोते हैं फिर उससे होनी वाली डेंड्रफ के लिए दूसरा शैम्पू लेते हैं। गोरेपन की क्रीम में सस्ते ब्लीच हैं जिससे आपकी त्वचा के अंदर की ग्रंथियां नष्ट होती हैं।
टूथपेस्ट में ब्लीच है जिससे आपके दांतों का इनेमल निरंतर नष्ठ हो रहा है।दूध में यूरिया ,साबुन, मैदा,अरारोट है। नमकीन में प्लास्टिक है। प्लास्टिक के चावल हैं। बिरयानी में आवारा जानवरों का गोश्त है। देसी घी में जानवरों की चर्बी है। मिर्च में ईंटों का पाउडर है। धनिये में लीद है। हल्दी में रंग है। मुर्गीयों को अब अंडे देने के लिए मुर्गे से शादी नही करनी पड़ती मुर्गे की जगह इंजेक्शन ने ले ली।
देशी शराब में सड़े फल,सब्जी से लेकर पुराने चप्पल जूते हैं। बल्बों में मरकरी है। पेट्रोल में केरोसिन है। एक दवा से एक बीमारी ठीक होती है तो दूसरी बीमारी शुरू हो जाती है।
टीचर तनख्वाह लेकर भी शाम को कोचिंग में पढ़ाते हैं।सरकारी डॉक्टर घर पर फीस लेते है। पुलिस रिश्वत से कमाती है। अफसर माल कमाते हैं। डॉक्टर आपको किडनी बदलने को कह आपसे नई किडनी के दाम लेते हैं और आपकी अच्छी भली किडनी दूसरे को बेच देते हैं।
सफेदपोश अपराधियों को पनाह देते है। तिलकधारी गायों को काटते हैं। गद्दार भारत मे पाकिस्तान की ज़िन्दाबाद बोलने की कीमत लेते हैं।
बाबा व धर्म गुरु फैक्टरियां चलाते हैं। पत्रकार झूट दिखाते हैं। नेता देश बेचते हैं। लाशों से insurence कमाते हैं। लोग टैक्स बचाते हैं। फर्जी मुकदमे करते हैं।
बीबी हो तो गर्लफ्रैंड ढूँढते हैं। गर्लफ्रैंड हो तो शादी नही करते हैं।
लड़कियां अफ़ेयर एक से करती हैं, घूमती दूसरे के साथ हैं,शादी तीसरे से करती हैं। लड़के दोस्त की गाड़ी को अपना बताकर लड़कियों से झूट बोलते हैं ।

झूट से शादी ब्याह होते हैं। झूट से शान दिखाते हैं। बच्चे कंप्यूटर पर पढ़ने के बहाने सनी लियोनी देखते हैं, डैडी देर रात तक आफिस वर्क के नाम पर दोस्तों के साथ पार्टी करते हैं।मम्मी फ्री होते ही नानी को फ़ोन लगाती हैं और दादी पड़ोस में बहु की बुराई बतियाती है। 
अब लोग साईकल सड़क पर नही जिम में 3000 रु देकर चलाते हैं। घर का वर्क बाइयाँ करती हैं और मैडम स्लिम दिखने के लिये 2 घण्टे वर्कआउट करती हैं।
जब गाय पालते थे तो दूध शुद्ध होता था,घी शुद्ध होता था, मिठाई शुद्ध होती थी।खाद शुद्ध होती थी उससे सब्जी व अनाज भी शुद्ध होता था तो तेल भी शुद्ध होता था।जब तक गाय समाज व कृषि से जुड़ी थी हमारे देश मे कैंसर नही था। 
फिर डेरी आईं। विदेशी गायें आईं ।लोगों में लालच आया और अपने साथ कैंसर लाया। गाय दूध की जगह कत्लखानों में कटने लगी कैंसर बढ़ने लगा।
ज्यादातर कृषि प्रधान उत्पाद गाय से प्रभावित थे। जहां गाय का गोबर था वहाँ रासायन आये …कैंसर आया।
गोरों की तरह दिखने की चाह में हमे अपनी चमड़ी का रंग चुभने लगा। प्रकृति ने विटामिन D का एक ही स्त्रोत दिया भरपूर धूप हम उससे बचने लगे क्योंकी गोरा दिखना था तो हड्डियों का कैंसर आया। 
50 की उम्र में घुटने जवाब देने लगे। 5 लाख में प्लास्टिक के घुटने बिकने लगे।
करीना,कटरीना,प्रियंका अपने बालों पर हर महीने हजारों रु खर्च करती है लेकिन हमारी बालाओं को वो बाल 5 रु के satchet में रेशम जैसे बाल मिलने की बात कहकर खूब उल्लू बनाती हैं। शाहरूख खान हर 6 महीने में प्लास्टिक सर्जरी कराता है लेकिन हमारे नवयुवकों को 50रु की क्रीम में गोरा होने का नुस्खा बताता हैं। पहले जीन्स में मोबाइल की पॉकेट होती थी अब कंडोम रखने की भी स्पेशल पॉकेट आती हैं। यानी पढ़ाई लिखाई छोड़ो सिर्फ इश्क़ मुश्क पर ध्यान दो।
सचिन व धोनी अपने बच्चों को कभी पेप्सी या कोला नही देते लेकिन आपको प्यास बुझाने के लिए कोला पीने को कहते हैं।जिससे डाईबेटिस व आंतें सड़ जाती हैं।
हमारे बाबा लोग भी कुछ कम नही हैं एक अपनी दाड़ी व बाल रंगकर आपको कुदरत का शैम्पू व तेल बेचते हैं।  तो दूसरे आपको खुश कैसे रहा जाए वो बताने के लिए 5 दिन के 5000 रु लेते हैं। तीसरे बाबा तो tv स्क्रीन से ही आपको आशीर्वाद दे देते हैं।
बिल्डर एक एकड़ के दाम देकर करोड़ों के घर बेचते हैं। इंसानों के रहने के लिए कबूतर के दड़बों जैसे घर बनवाते हैं। किसान को झांसा देकर खेती की ज़मीन खरीद लेते हैं फिर किसान क्यो मरता है उसके लिये सरकार को लोग कोसते हैं।
मोबाइल कंपनियां एक साल फ्री डाटा देकर दूसरे साल उसपर चौगुनी कीमत वसूल लेती हैं। घरों में आटा कम आता है डाटा ज्यादा।
संगीतकार विदेशी धुनें चोरी करते हैं,फिल्मकार विदेशी कहानियां। देश के बैंकों  मे रुपिया बदल जाता है लेकिन विदेशी लॉकरों में डॉलर बढ़ता जाता है।
कांग्रेस वाले बीजेपी को गाली देते हैं, आप वाले कांग्रेस को,माया मुलायम को गाली देती है मुलायम मोदी को.. संसद की कैंटीन में सब 2 रु चाय साथ साथ पीते हैं।
लोग कमल की टोपी पहने घर से निकलते है लेकिन चुपके से हाथ को भी सलाम करते हैं। झाड़ू वाले बैक डोर से कमल वालों के मिलने की तैयारी रखते हैं।

कुल मिलाकर हम सब एक दूसरे को किसी ना किसी रूप में धोखा दे रहे हैं। हर जगह झूट का राज है।हर जगह विश्वासघात है। दोहरे मापदंड, अज्ञानता, स्वार्थ जड़ों तक घुस गये।
और ये ही सबसे बड़ा कैंसर है। सारा देश इस कैंसर का शिकार है और हम सब ही इसके लिए ज़िम्मेदार हैं।

Pakistani Buzkashi

buzkashi

अफगानिस्तान का एक खेल हुआ करता है जिस का नाम है “बुज़काशी” इस खेल में घोड़े पर सवार घुड़सवार एक मरी हुई भेड़ को फुटबॉल की तरह से खेलते है और जीतने वाला मरी भेड़ को जीत की निशानी के तौर पर सबको दिखाता है।

आज पाकिस्तान हमारे शहीदों के शरीर के साथ वही बुज़काशी खेल रहा है। और एक भी वामपंथी,उग्रपंथी और मानवता की बात करने वाले आगे आकर पाकिस्तान के घिनोनो कृत्यों की चर्चा नही कर रहे।

ये पाकिस्तान नही कसाइयों की मंडी है जहाँ बर्बरता की सीमा खत्म हो गई है।

पाकिस्तान के संवीधान में आदर्श और असूल नाम के शब्द नही हैं, अब तक तो आतंकवादी ही गोली मारने व बर्बरता से हत्या करने के वीडियो जारी करते थे लेकिन अब एक देश की सेना यह कर रही हैं।

एक और हमारी सेना पूरे आदर के साथ पाकिस्तानी सैनिकों के शव वापिस करती रही है लेकिन पाकिस्तान से ऐसी कोई भी उम्मीद करना सांप के मुँह से अमृत निकालने जैसा है।

1949 के जेनेवा कन्वेंशन के आर्टिकल 16 में ये साफ तौर पर लिखा है की सैन्य जरूरतों के अनुसार मारे गए लोगों के शव का सम्मान करना चाहिये व उसे सुरक्षित रखने के हरसंभव कदम उठाने चाहिये।

1977 के एडिशनल प्रोटोकॉल में भे आर्टिकल 34(1) के अनुसार संघर्ष में मारे गए बंदी या कब्ज़े में होने वाले पार्थिव शरीरों का उचित सम्मान करना चाहिए।

Crimes of War में वेन इलियट के स्पष्ट रूप से लिखा है की प्रथम जेनेवा कन्वेंशन के आर्टिकल 15 में घायलों की मदद व मृतकों के शरीर को खराब न होने देने की बात कही है।

Internationally Red Cross committee ने भी कहा है की घयलों के साथ मृतकों को भी वापिस लाया जाए जिससे मरने वाले लोगों के बारे में पता लग सके।

लेकिन पाकिस्तान इनमे से किसी नियम का पालन नही करता।

क्यो?

क्योंकि वो घाघ है ।इस तरह की घटनाएं एक सोची समझी कूटनीति है, इस प्रकार की घटनाओं के परिणाम स्वरूप दो प्रकार की प्रतिक्रियाएं होती हैं:-

■पहली देश की जनता व सेना विचलित होकर सरकार को दोष देने लगती है इससे देश की अंदरूनी व्यवस्था असंतुलित हो सकती है और ये देश के दुश्मनों की मंशा होती है। जब फौज व जनता सरकार से युद्ध के लिए दबाव बनाती है तो सरकार प्रेशर में आ जाती है।
प्रतिक्रिया ना करने की स्थिति में जनता गुस्से में अपने ही देश मे तोड़फोड़ व अस्थिरता पैदा कर सकती है उस स्थिति में बाहरी सीमा से ध्यान हटकर अंदुरूनी स्थितयों को कंट्रोल करने में लग जाता है और सीमा कमज़ोर होने की स्थिती में दुश्मन का कार्य आसान हो जाता है । यहाँ सिर्फ पाकिस्तानी ही दुश्मन नही बल्कि चीन भी उसके साथ मिला हुआ है। इस स्थिति में भारत को एक बड़े खतरे का सामना करना पड़ सकता है।

■दूसरी स्थिति ये होगी की ऐसी हरकतें करने पर भारत पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ दे। उस स्थिति में पाकिस्तान विश्व् के सामने अपनी रक्षा के लिए परमाणु हथियार भी इस्तेमाल कर सकता है जिसमे हमारे कुछ और दुश्मन भी साथ दे सकते हैं ।

हाँलाकि राज्यों द्वारा बल के उपयोग को रिवाज़ानुसार अंतराष्ट्रीय कानून व संधि कानून दोने से नियंत्रित किया जा सकता है।

लेकिन भारत के पहले हमला करने की स्थिति में पाकिस्तान को अंतराष्ट्रीय कानून में आत्म रक्षा के अनुछेदद के तहत आत्मरक्षा में किये गए परमाणु वार को उचित करार दिया जा सकता है।

पाकिस्तान को ये युति इस्तेमाल करने के लिए ये दिखाना ज़रूरी है की हमले की पहल भारत ने की।

भारत ने सन 2003 में *परमाणु हथियार का पहला उपयोग* No First Use या NFU . करने की अपनी नीति को व्यक्त किया था
सन 1998 में परमाणु परिक्षण के बाद भारत ने यह कहा की वो सिर्फ प्रतिशोध या प्रतिक्रिया की स्थिति में ही परमाणु हथियारों का उपयोग करेगा। इस स्थिति में यदि कोई पाकिस्तान पहले परमाणु हथियार चलाये या भारत के ये पता लगे की पाकिस्तान परमाणु हथियार दागने की तैयारी कर रहा है तो ही भारत परमाणु हथियार चलाएगा।

2010 में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन ने बाद में इसे “गैर परमाणु हथियार राज्य के खिलाफ कोई भी पहला उपयोग ” में बदल दिया यानी यदि कोई गैर परमाणु शक्ति वाला राज्य युद्ध मे है तो भारत उसपर परमाणु हथियार नही प्रक्षेपित करेगा।

लेकिन यदि दूसरा राज्य भी परमाणु शक्ति से लैस है और वो भारत पर परमाणु हमला करने की तैयारी में है तो भारत परमाणु हथियार छोड़ सकता है।

हंमारी सेना के विशेषज्ञ कोई मूर्ख नही हैं ना ही हमारे युद्ध नीतियां। एक आम देशवासी व सेना का साधारण सिपाही इन नीतियों की गूढ़ता को नही समझ सकते।

युद्धनीति भावनाओं से या त्वरित आवेश से परे होती हैं। पाकिस्तान हमे गुस्सा दिलाने की हर सम्भव कोशिश कर रहा है उसे पता है की भारत की जनता खौल रही है।

यदि आप ध्यान दे तो पिछले कुछ समय से आतंकी आम जनता को छोड़कर सेना को और अर्धसैनिक बलों को निशांना बना रहे हैं !

क्यों???

आतंकवादी, पाकिस्तानी, उग्रवादी ,नक्सल व वामपंथी तरह तरह से सेना पर इसीलये हमला कर रहे हैं जिससे जनमानस में क्रोध जाग्रत हो ,सेना में गुस्सा भड़के।

इसी आवेश में या तो देश में तोड़फोड़ व दंगे की स्थिति पैदा हो या हंमारी सेना के अन्दर बिद्रोह की स्थिति पैदा हो जाये।

सेना को क्रोध दिलाकर बलवे की स्थिति पैदा करने की कोशिश की जा रही है।

इस षड्यंत्र में बहुत बड़ी बड़ी शक्तियां शामिल है यहां तक की सत्ताच्युत हुए नेता भी। आप लोग सोच भी नही सकते किस प्रकार की शक्तियां संगठित हो भारत के विरुद्ध ये षड्यंत्र रच रही है।

दुश्मन की चाल को समझिये व उतेजित होकर सरकार व सेना को कमज़ोर मत करिये। सेना को पता है उसे क्या करना है एक गलत फैसले से 125 करोड़ लोगों को दांव पर नही लगाया जा सकता।

हंमारी सेना ना तो चुप बैठी है ना ही हमने चूड़ियां पहन रखी है जिस घड़ी पाकिस्तान ने छोटा सा भी हमला किया हम लोग उसे नेस्तनाबूद कर देंगे। हंमारी फ़ौज तैयार है लेकिन हम पहले हमला कर पाकिस्तान की चाल में नही फंसेंगे।

इस समय सारा विश्व् भारत की ओर देख रहा है।

समाज मे फूट फैलने से रोके ….युद्ध की स्थिति में यह आम नागरिक का सबसे बड़ा कर्तव्य है को वो देश की स्थिरता व एकता बनाये रखने में सहयोग दे।

परमजीतसिंहप्रेमसागर की कुर्बानी व्यर्थ ना जाने पाये।
श्रद्धांजली व नमन इन शहीदों को

 

Our Individual Time Zone

time

 

कालः सुप्तेषु जागर्ति कालो हि दुरतिक्रमः ।
कालः सर्वेषु भूतेषु चरत्यविधृतः समः ।।

क्या आप जानते हैं म्यामार (बर्मा) भारत से एक घण्टे आगे है तो क्या हम कहेंगे भारत म्यामार से धीरे है ?
भारत ब्रिटेन से 4.30 घण्टा आगे है तो क्या ब्रिटेन भारत से पीछे रह गया है?

जी नही !!दिन का जो समय भारत मे आता है वही समय म्यामार में एक घंटा पहले था और वही समय ब्रिटेन में साढ़े चार घन्टो बाद होगा।

यानी हम सब अपने समय मे चल रहे हैं!!

किसी की शादी छुटपन में हो गई कोई अभी कुंवारा है किसी के बच्चे सालों तक नही होती किसी के एक साल में ही हो जाते हैं

कोई 22 साल की उम्र में पढ़ाई खत्म कर 30 साल तक नौकरी के इंतज़ार में बैठा है और कोई 30 साल की उम्र में पढ़ाई खत्म करते ही नौकरी पा जाता है।

कुछ लोग 20 साल की उम्र में फौज में जाते हैं और 35 साल पर रिटायर भी हो जाते हैं कुछ लोग 35 साल पर नौकरी शुरू करते है और 60 साल में रिटायर होते हैं।

एक जवान इंसान एक्सीडेंट में मर जाता है और एक बीमार बुढा 90 साल की उम्र तक जीता रहता है।

क्यों????

क्योंकी हम सब अपने समय के दायरे में चलते हैं। हम अपना जीवन सिर्फ अपने समय के परिपेक्ष्य में जी सकते हैं किसी दूसरे के नही।

कभी कभी आपको लगता होगा आपके मित्र, भाई बहन आपसे आगे निकल गए और कभी आप कुछ लोगों से आगे निकल गये वो इसलिये की हममे से हर एक के समय की गति अलग है।

हम सभी को जीवन मे अपने समय मे ,अपनी गति से और अपने मार्ग से चलना होता है। इश्वेर ने हम सब के लिए एक व्यक्तिगत खाका तैयार किया है जो किसी दूसरे से अलग है

हमारी गति अलग है हमारा समय अलग है।

मोदी जी 8 साल की उम्र से RSS में थे किंतु 50 साल की उम्र में पहली बार MLA फिर CM बने ,योगी जी 26 साल की उम्र में MP बन गए और 44 साल की उम्र में CM!!

राजीव गांधी 40 साल की उम्र में प्रधान मंत्री बने और 46 साल की उम्र में मर गए मोरारजी देसाई 81 साल की उम्र में प्रधानमंत्री बने और 99 साल की उम्र में मरे!!

55साल की उम्र में ओबामा रिटायर हो गये और 70 साल की उम्र में डोनाल्ड ट्रम्प ने अपना कार्यकाल शुरू किया!!

जब 20साल का एक इंसान जवान कहा जाता है तो कुते के लिए वो आखिरी समय होता है।

जब हम एक ही दिन में रात व दिन महसूस करते हैं तो उत्तरी ध्रुव पर रहने वाले एस्किमो 6 महीने तक सिर्फ रात व 6 महीने तक सिर्फ दिन में रहते हैं तो क्या एक साल उनके लिए एक दिन व एक रात हैं?

घड़ियां कितनी भी हों समय एक ही होता है किंतु आपका व हमारा समय हमें अलग अलग परिणाम देता है।

कोई हमसे आगे है पीछे इससे कोई फर्क नही पड़ता क्योंकि हमें अपने समयनुसार चलना होता है।

किसी से अपनी तुलना मत करिये अपने समय के साथ चलिये।

कुछ देर नही हुई है..!!!

ना आपकों नौकरी मिलने में
ना शादी होने में
ना बच्चा होने में
ना प्रमोशन में
ना गाड़ी खरीदने में
ना घर खरीदने में
ना इन्क्रीमेंट बढ़ने में

जिस समय आप बुरे समय को कोस रहे होते हैं समय उस वक़्त भी चल रहा होता है जिस समय आप अच्छे वक़्त में ठहाके लगा रहे होते हैं समय उस वक़्त भी चल रहा होता है।

आपको भले ही लगे देर हो रही है किंतु समय जानता है की उसे कब आना है

ना तो देर हुई हैं ना ही कोई जल्दी है ,क्योंकि आपका समय अपने समय पर ही आएगा

बस !!भरोसा रखिये!!!