Pakistani Buzkashi

buzkashi

अफगानिस्तान का एक खेल हुआ करता है जिस का नाम है “बुज़काशी” इस खेल में घोड़े पर सवार घुड़सवार एक मरी हुई भेड़ को फुटबॉल की तरह से खेलते है और जीतने वाला मरी भेड़ को जीत की निशानी के तौर पर सबको दिखाता है।

आज पाकिस्तान हमारे शहीदों के शरीर के साथ वही बुज़काशी खेल रहा है। और एक भी वामपंथी,उग्रपंथी और मानवता की बात करने वाले आगे आकर पाकिस्तान के घिनोनो कृत्यों की चर्चा नही कर रहे।

ये पाकिस्तान नही कसाइयों की मंडी है जहाँ बर्बरता की सीमा खत्म हो गई है।

पाकिस्तान के संवीधान में आदर्श और असूल नाम के शब्द नही हैं, अब तक तो आतंकवादी ही गोली मारने व बर्बरता से हत्या करने के वीडियो जारी करते थे लेकिन अब एक देश की सेना यह कर रही हैं।

एक और हमारी सेना पूरे आदर के साथ पाकिस्तानी सैनिकों के शव वापिस करती रही है लेकिन पाकिस्तान से ऐसी कोई भी उम्मीद करना सांप के मुँह से अमृत निकालने जैसा है।

1949 के जेनेवा कन्वेंशन के आर्टिकल 16 में ये साफ तौर पर लिखा है की सैन्य जरूरतों के अनुसार मारे गए लोगों के शव का सम्मान करना चाहिये व उसे सुरक्षित रखने के हरसंभव कदम उठाने चाहिये।

1977 के एडिशनल प्रोटोकॉल में भे आर्टिकल 34(1) के अनुसार संघर्ष में मारे गए बंदी या कब्ज़े में होने वाले पार्थिव शरीरों का उचित सम्मान करना चाहिए।

Crimes of War में वेन इलियट के स्पष्ट रूप से लिखा है की प्रथम जेनेवा कन्वेंशन के आर्टिकल 15 में घायलों की मदद व मृतकों के शरीर को खराब न होने देने की बात कही है।

Internationally Red Cross committee ने भी कहा है की घयलों के साथ मृतकों को भी वापिस लाया जाए जिससे मरने वाले लोगों के बारे में पता लग सके।

लेकिन पाकिस्तान इनमे से किसी नियम का पालन नही करता।

क्यो?

क्योंकि वो घाघ है ।इस तरह की घटनाएं एक सोची समझी कूटनीति है, इस प्रकार की घटनाओं के परिणाम स्वरूप दो प्रकार की प्रतिक्रियाएं होती हैं:-

■पहली देश की जनता व सेना विचलित होकर सरकार को दोष देने लगती है इससे देश की अंदरूनी व्यवस्था असंतुलित हो सकती है और ये देश के दुश्मनों की मंशा होती है। जब फौज व जनता सरकार से युद्ध के लिए दबाव बनाती है तो सरकार प्रेशर में आ जाती है।
प्रतिक्रिया ना करने की स्थिति में जनता गुस्से में अपने ही देश मे तोड़फोड़ व अस्थिरता पैदा कर सकती है उस स्थिति में बाहरी सीमा से ध्यान हटकर अंदुरूनी स्थितयों को कंट्रोल करने में लग जाता है और सीमा कमज़ोर होने की स्थिती में दुश्मन का कार्य आसान हो जाता है । यहाँ सिर्फ पाकिस्तानी ही दुश्मन नही बल्कि चीन भी उसके साथ मिला हुआ है। इस स्थिति में भारत को एक बड़े खतरे का सामना करना पड़ सकता है।

■दूसरी स्थिति ये होगी की ऐसी हरकतें करने पर भारत पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ दे। उस स्थिति में पाकिस्तान विश्व् के सामने अपनी रक्षा के लिए परमाणु हथियार भी इस्तेमाल कर सकता है जिसमे हमारे कुछ और दुश्मन भी साथ दे सकते हैं ।

हाँलाकि राज्यों द्वारा बल के उपयोग को रिवाज़ानुसार अंतराष्ट्रीय कानून व संधि कानून दोने से नियंत्रित किया जा सकता है।

लेकिन भारत के पहले हमला करने की स्थिति में पाकिस्तान को अंतराष्ट्रीय कानून में आत्म रक्षा के अनुछेदद के तहत आत्मरक्षा में किये गए परमाणु वार को उचित करार दिया जा सकता है।

पाकिस्तान को ये युति इस्तेमाल करने के लिए ये दिखाना ज़रूरी है की हमले की पहल भारत ने की।

भारत ने सन 2003 में *परमाणु हथियार का पहला उपयोग* No First Use या NFU . करने की अपनी नीति को व्यक्त किया था
सन 1998 में परमाणु परिक्षण के बाद भारत ने यह कहा की वो सिर्फ प्रतिशोध या प्रतिक्रिया की स्थिति में ही परमाणु हथियारों का उपयोग करेगा। इस स्थिति में यदि कोई पाकिस्तान पहले परमाणु हथियार चलाये या भारत के ये पता लगे की पाकिस्तान परमाणु हथियार दागने की तैयारी कर रहा है तो ही भारत परमाणु हथियार चलाएगा।

2010 में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन ने बाद में इसे “गैर परमाणु हथियार राज्य के खिलाफ कोई भी पहला उपयोग ” में बदल दिया यानी यदि कोई गैर परमाणु शक्ति वाला राज्य युद्ध मे है तो भारत उसपर परमाणु हथियार नही प्रक्षेपित करेगा।

लेकिन यदि दूसरा राज्य भी परमाणु शक्ति से लैस है और वो भारत पर परमाणु हमला करने की तैयारी में है तो भारत परमाणु हथियार छोड़ सकता है।

हंमारी सेना के विशेषज्ञ कोई मूर्ख नही हैं ना ही हमारे युद्ध नीतियां। एक आम देशवासी व सेना का साधारण सिपाही इन नीतियों की गूढ़ता को नही समझ सकते।

युद्धनीति भावनाओं से या त्वरित आवेश से परे होती हैं। पाकिस्तान हमे गुस्सा दिलाने की हर सम्भव कोशिश कर रहा है उसे पता है की भारत की जनता खौल रही है।

यदि आप ध्यान दे तो पिछले कुछ समय से आतंकी आम जनता को छोड़कर सेना को और अर्धसैनिक बलों को निशांना बना रहे हैं !

क्यों???

आतंकवादी, पाकिस्तानी, उग्रवादी ,नक्सल व वामपंथी तरह तरह से सेना पर इसीलये हमला कर रहे हैं जिससे जनमानस में क्रोध जाग्रत हो ,सेना में गुस्सा भड़के।

इसी आवेश में या तो देश में तोड़फोड़ व दंगे की स्थिति पैदा हो या हंमारी सेना के अन्दर बिद्रोह की स्थिति पैदा हो जाये।

सेना को क्रोध दिलाकर बलवे की स्थिति पैदा करने की कोशिश की जा रही है।

इस षड्यंत्र में बहुत बड़ी बड़ी शक्तियां शामिल है यहां तक की सत्ताच्युत हुए नेता भी। आप लोग सोच भी नही सकते किस प्रकार की शक्तियां संगठित हो भारत के विरुद्ध ये षड्यंत्र रच रही है।

दुश्मन की चाल को समझिये व उतेजित होकर सरकार व सेना को कमज़ोर मत करिये। सेना को पता है उसे क्या करना है एक गलत फैसले से 125 करोड़ लोगों को दांव पर नही लगाया जा सकता।

हंमारी सेना ना तो चुप बैठी है ना ही हमने चूड़ियां पहन रखी है जिस घड़ी पाकिस्तान ने छोटा सा भी हमला किया हम लोग उसे नेस्तनाबूद कर देंगे। हंमारी फ़ौज तैयार है लेकिन हम पहले हमला कर पाकिस्तान की चाल में नही फंसेंगे।

इस समय सारा विश्व् भारत की ओर देख रहा है।

समाज मे फूट फैलने से रोके ….युद्ध की स्थिति में यह आम नागरिक का सबसे बड़ा कर्तव्य है को वो देश की स्थिरता व एकता बनाये रखने में सहयोग दे।

परमजीतसिंहप्रेमसागर की कुर्बानी व्यर्थ ना जाने पाये।
श्रद्धांजली व नमन इन शहीदों को

 

Need For National Character

चीनियों ने अपने राष्ट्रीय पहचान के लिए चीन की दीवार “The Great Wall of China” बनाई जो दुनिया के 7 अजूबों में से एक है ।
उसके पीछे सोच थी की शायद इतनी ऊंची दीवार फांद कर कोई आक्रमण नही कर पायेगा किन्तु दीवार बनने के पहले 100 सालों में चीन पर 3 बार आक्रमण हुआ, और ये आक्रमण दीवार तोड़ कर या फांद कर नही किये गए बल्कि प्रहरियों को रिश्वत देकर दुश्मन अंदर घुस जाते थे
और ये इसलिये की चीनीयों ने पत्थर की दीवार को तो निर्माण कर लिया किन्तु वो अपने सैनिकों का चरित्र निर्माण व राष्ट्रीय चरित्र बनना भूल गये…..
कुछ इसी प्रकार के प्रहरी भारत मे कहीं कहीं होते है जो सेना व देश की गुप्त सूचनाएं दुश्मन तक पहुंचाते हैं। मुम्बई में समुन्दर के रास्ते घुसने वाले आतंवादियों को सारी सूचना किसी अंदर वाले ने ही दी थी ।
कश्मीर में BSF की चौकियों की अन्दुरुनी सूचना भी किसी अंदर वाले ने ही दी थी।
Siri के आतंकवादी जेल से फरार होने में सफल इसीलये हुए की कोई अंदर वाला बिक गया।

चीनी में एक कहावत है :-
*यदि आप किसी देश की संस्कृति को नष्ट करना चाहते है तो उसके 3 बड़े ही माकूल तरीके हैं :
1.पारिवारिक संरचनाओं को छिन्न भिन्न कर दो
2. शिक्षा का स्तर गिरा दो
3. समाज के आदर्शों को बदल दो व गलत व्यक्तियों का गुणगान करने लगो
भारतवर्ष में परिवार की संरचना पूर्णरूप से खंडित हो रही हैं । पारिवारिक कलह व झगड़े बढ़ रहे हैं । दायित्वों में कमी आ रही है। परिवार में द्वेष व ईर्ष्या का बोलबाला है। बच्चे उपेक्षित है,बुज़ुर्ग दयनीय अवस्था मे हैं,औरतें बच्चे नही पैदा करना चाहती,पुरुष काम नही करना चाहते। भाई भाई से बहन बहन से जायदाद के लिए कोर्ट कचहरी कर रही हैं। परिवार में ही लोग काटकपट करने लगे हैं।
शिक्षा के नाम पर भी अनाचार है, शिक्षक अज्ञानी हैं,शिक्षा पैसे से खरीदी जा रही है,पैसे देकर अध्यापक बनाये जा रहे हैं, प्राइवेट स्कूल लूट रहे है, आरक्षण से होनहार बच्चों का जज़्बा टूट रहा है। बच्चों पर ज्ञान का नही बल्कि percentage लाने का भूत सवार है।
समाज के आदर्श बदल रहे हैं, अपना उल्लू सीधे करने वाले नेताओं के हज़ारों अनुयायी हैं,पाखंडी बाबा लोग हैं, नवयुवक भाईगीरी को शान समझते हैं, गैंगस्टर्स के लिए जान देने वाले लोग हैं। धार्मिक उत्पाद फैलाने वालों की रैली में हज़ारों लोग होते हैं।गुंडों पर बनी फिल्में सफल होती हैं।

क्या संस्कार खरीदे जा सकते हैं?
जरा सोच के देखिये!!!
आक्रमण तो हर ऒर से हो रहा है!!
विदेशियों के घुसे बिना भी! और जब तक चरित्र निर्माण पर ध्यान नही दिया जाता हम पर ऐसे ही आक्रमण होते रहेंगे